उज़्बेकिस्तान में 21‑ साल की केरल मेडिकल छात्रा की रहस्यमयी हत्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है। परिवार का कहना है कि सहपाठी ने लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव डालते हुए उसे मार डाला, और अब नई जांच व आरोपी की भारत में प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल की मेडिकल छात्रा Sawariya Basanth की हत्या उज़्बेकिस्तान में हुई
  • परिवार ने धार्मिक परिवर्तन के दबाव का आरोप लगाया
  • भारत सरकार से आरोपी Sadarul Anam को भारत लाने की मांग

उज़्बेकिस्तान के बुखारा राज्य मेडिकल संस्थान में पढ़ रही 21‑ साल की केरल की छात्रा Sawariya Basanth को 10 जुलाई 2026 को एक सहपाठी द्वारा मार डाला गया, जैसा कि स्थानीय अधिकारियों और भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है। इस हत्या को “सिर से पैर तक चोटें” के रूप में वर्णित किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक अचानक या आकस्मिक हमला नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और क्रूर कृत्य था।

पृष्ठभूमि और आरोपी की पहचान

जांच में बताया गया कि आरोपी Sadarul Anam, 22‑ साल का केरल के मालप्पुरम जिले से आया एक छात्र, उसी हॉस्टल में महिला छात्रा के साथ रहता था। पुरुष और महिला छात्र अलग‑अलग मंजिलों में रहे होते हैं, पर दोनों के बीच सामाजिक संपर्क संभव था। परिवार के अनुसार, अनाम ने कई हफ़्तों तक बासंथ को अपना धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला, और कई बार शारीरिक उत्पीड़न किया।

परिवार का दावा और नई पोस्ट‑मोर्टेम

बासंथ के चाचा जनीश ने बताया कि उज़्बेकिस्तान के एक जांच अधिकारी ने कहा कि शरीर पर सिर से लेकर पैर तक कई घाव थे, जो एक मिनट में लापरवाही से नहीं हुए होते। भारतीय अधिकारियों ने परिवार की मांग पर अल्पुज़ा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दूसरा पोस्ट‑मोर्टेम करवाया, जिसमें शारीरिक उत्पीड़न के स्पष्ट संकेत मिले।

कानूनी प्रक्रिया और भारत‑उज़्बेकिस्तान सहयोग

केरल के हरिप्पाद पुलिस ने हत्या के केस को दर्ज किया है और अब उज़्बेकिस्तान के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही है। भारत के दूतावास ने मृतक के परिवार को पूरी सहायता देने का आश्वासन दिया है, जिसमें शव की पुनर्प्राप्ति और प्रत्यर्पण शामिल है। परंतु परिवार ने स्पष्ट तौर पर मांग की है कि जांच भारत में स्थानांतरित की जाए और आरोपी को भारत लाया जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया को स्थानीय कानून के तहत तेज़ी से पूरा किया जा सके।

भविष्य की संभावनाएँ और सामाजिक प्रभाव

यह घटना भारतीय छात्रों की विदेश में सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मुद्दों को फिर से उजागर करती है। यदि उचित रूप से निपटा नहीं गया तो यह अन्य छात्रों के बीच भय और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है, साथ ही भारत‑उज़्बेकिस्तान संबंधों में तनाव भी उत्पन्न कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी और त्वरित जांच न केवल पीड़ित के परिवार को न्याय दिलाएगी, बल्कि दो देशों के बीच विश्वास को भी सुदृढ़ करेगी।