अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन स्कैम सेंटर मानव तस्करी का सबसे तेजी से बढ़ता रूप बन गए हैं, जिसमें 80 से अधिक देशों के लोग शिकार हो रहे हैं।
मुख्य बातें
- ऑनलाइन स्कैम सेंटर मानव तस्करी का सबसे तेजी से बढ़ने वाला रूप बन गए हैं।
- 80 से अधिक देशों के शिक्षित युवा फर्जी नौकरी के झांसे में फंस रहे हैं।
- दक्षिण-पूर्व एशिया के स्कैम केंद्रों में लगभग 3,00,000 लोग कार्यरत हैं।
- ग्लोबल स्कैम ऑपरेशन्स से सालाना $88 बिलियन से $114 बिलियन का नुकसान हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि ऑनलाइन स्कैम सेंटर दुनिया भर में मानव तस्करी को बढ़ावा देने वाले प्रमुख केंद्र बन गए हैं। जिनेवा में मीडिया को संबोधित करते हुए, IOM की महानिदेशक एमी पोप ने कहा कि 80 से अधिक देशों के लोगों को सोशल मीडिया पर फर्जी नौकरी के प्रस्तावों के माध्यम से इन आपराधिक केंद्रों में फंसाया जा रहा है।
ये आपराधिक नेटवर्क विशेष रूप से शिक्षित नौकरी खोजने वालों को निशाना बना रहे हैं। वे सोशल मीडिया पर विज्ञापनों का उपयोग करते हैं और उन लोगों को आकर्षित करते हैं जिनके पास अच्छी अंग्रेजी और विश्वविद्यालय की डिग्री है। एक बार जब ये शिकार म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के स्कैम परिसरों में पहुँच जाते हैं, तो उनसे उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें शारीरिक व मानसिक शोषण का सामना करना पड़ता है।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह केवल एक साइबर अपराध नहीं है, बल्कि एक संगठित मानव अधिकार उल्लंघन है। यह डिजिटल युग की एक नई और खतरनाक वास्तविकता है जहाँ तकनीक का उपयोग शोषण के लिए किया जा रहा है।
"स्कैम परिसरों में फंसे लोग तस्करी के शिकार हैं, जिन्हें हिंसा, धमकी और जबरदस्ती के माध्यम से अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता है।" - एमी पोप
संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थों और अपराध कार्यालय (UNODC) के अनुमानों के अनुसार, पिछले साल ऑनलाइन स्कैम ऑपरेशन्स से वैश्विक स्तर पर $88 बिलियन से $114 बिलियन का नुकसान हुआ है। IOM ने अब तक 33 देशों के 3,500 से अधिक उत्तरजीवियों (survivors) की मदद की है, जो अक्सर गहरे सदमे और कर्ज के बोझ तले दबे होते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पारंपरिक मानव तस्करी अक्सर शारीरिक बल या अपहरण पर आधारित होती थी, लेकिन पिछले एक दशक में डिजिटल क्रांति ने इसे 'व्हाइट कॉलर' तस्करी में बदल दिया है, जहाँ सोशल मीडिया और फर्जी जॉब पोर्टल्स का उपयोग शिकार को जाल में फंसाने के लिए किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: स्कैमर्स मुख्य रूप से किन लोगों को निशाना बनाते हैं?
उत्तर: वे शिक्षित युवाओं को निशाना बनाते हैं जिनके पास अच्छी भाषा कौशल और डिग्री होती है।
प्रश्न 2: इन केंद्रों में पीड़ितों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है?
उत्तर: उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना दी जाती है।