संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में इजरायली कब्जे और घरों को गिराने की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया है। उन्होंने इजरायल से तत्काल इन गतिविधियों को रोकने का आह्वान किया है।

मुख्य बातें

  • UN प्रमुख वोल्कर तुर्क ने लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई।
  • घरों के ध्वस्तीकरण को 'व्यापक विनाश' और युद्ध अपराध की श्रेणी में बताया जा सकता है।
  • लेबनान और इजरायल के बीच रोम में महत्वपूर्ण वार्ता होने वाली है।
  • हिजबुल्लाह ने निशस्त्रीकरण की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने सोमवार को कहा कि इजरायल को दक्षिणी लेबनान के बड़े क्षेत्रों पर अपने कब्जे को समाप्त करना चाहिए और घरों को गिराने की कार्रवाई को तुरंत रोकना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेबनानी और इजरायली अधिकारी एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौर की बातचीत के लिए तैयार हो रहे हैं।

तुर्क ने लेबनान की अपनी यात्रा के समापन पर द एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए कहा कि इजरायली कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकती हैं। उन्होंने नागरिक घरों के "व्यापक विनाश" पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे युद्ध अपराधों की श्रेणी में आने वाली कार्रवाई करार दिया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, लेबनान में जारी यह संकट न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाता है। यदि इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखता है, तो आगामी रोम वार्ता विफल हो सकती है, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है।

"इस प्रकार का ध्वस्तीकरण अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुपालन पर बड़े सवाल खड़े करता है," तुर्क ने कहा।

लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने तुर्क से मुलाकात के दौरान कहा कि लेबनान समझौते के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन इजरायल की निरंतर सैन्य उपस्थिति और घर गिराने की कार्रवाई समझौते की प्रभावशीलता को कम कर सकती है। दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि उसके हमले हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे और कर्मियों को निशाना बनाने के लिए किए जा रहे हैं, जो नागरिकों के बीच छिपे हुए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वर्तमान संघर्ष की शुरुआत मार्च में हुई थी, जब हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे थे। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में हवाई हमले और जमीनी आक्रमण शुरू किया, जिसमें 4,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और 12 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।

क्या आप जानते हैं?: लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष में अब तक 1.2 मिलियन से अधिक लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. संयुक्त राष्ट्र ने इजरायल की किस कार्रवाई की आलोचना की है?

संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना द्वारा घरों को गिराने और नागरिक बुनियादी ढांचे के विनाश की आलोचना की है।

2. रोम वार्ता का मुख्य उद्देश्य क्या है?

रोम वार्ता का उद्देश्य 26 जून को हुए समझौते को लागू करना है, जिसमें इजरायली सेना की वापसी और हिजबुल्लाह के निशस्त्रीकरण की योजना शामिल है।