ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण यमन में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे निर्माण सामग्री महंगी हो गई है और हजारों मजदूरों का काम छिन गया है।
मुख्य बातें
- ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।
- यमन में डीजल की कीमतों में लगभग 80% तक का उछाल आया है।
- निर्माण सामग्री (रेत, कांच) के दाम बढ़ने से प्रोजेक्ट्स बीच में ही रुक गए हैं।
- मजदूरों की दैनिक मजदूरी में भारी कटौती करनी पड़ रही है।
यमन के ताइज शहर में 46 वर्षीय फुआद मोहम्मद जैसे हजारों निर्माण श्रमिक आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले 25 वर्षों से निर्माण कार्य में लगे फुआद बताते हैं कि फरवरी में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध ने यमन की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है।
क्षेत्रीय युद्ध का प्रभाव केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर यमन की जेब पर पड़ रहा है। जनवरी में जहाँ 20 लीटर डीजल की कीमत 25,000 यमनी रियाल थी, वहीं अब यह बढ़कर 45,000 रियाल ($30) तक पहुँच गई है। इस वृद्धि ने निर्माण क्षेत्र में 'डोमिनो इफेक्ट' पैदा कर दिया है, जिससे रेत, सीमेंट और कांच जैसी आवश्यक सामग्रियों की लागत बढ़ गई है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यमन की अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है क्योंकि देश अपनी 90% ज़रूरतें आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और समुद्री बीमा की बढ़ती लागतों ने आयात को और भी महंगा बना दिया है।
"वैश्विक कमोडिटी बाजारों में कोई भी व्यवधान सीधे स्थानीय बाजार को प्रभावित करता है क्योंकि यमन अपनी लगभग 90 प्रतिशत जरूरतों का आयात करता है।" - वफीक सालेह, कार्यकारी निदेशक, ताइज सेंटर फॉर यमन-गल्फ स्टडीज।
निर्माण लागत में वृद्धि का डेटा इस प्रकार है:
| सामग्री | पुरानी कीमत (रियाल) | नई कीमत (रियाल) |
|---|---|---|
| एक ट्रक रेत | 130,000 | 190,000 |
| एक मीटर कांच | 90,000 | 130,000 |
| 20 लीटर डीजल | 25,000 | 45,000 |
वर्तमान में, यमन के सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में अधिकांश निर्माण प्रोजेक्ट्स को मालिकों के अनुरोध पर रोक दिया गया है। मजदूर अब अपनी दैनिक मजदूरी को 25,000 रियाल से घटाकर 20,000 रियाल तक करने को मजबूर हैं ताकि उन्हें कुछ काम मिल सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यमन दशकों से गृहयुद्ध और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है। देश वर्तमान में दो अलग-अलग आर्थिक संरचनाओं में विभाजित है, जहाँ अदन और सना में अलग-अलग केंद्रीय बैंक और विनिमय दरें काम कर रही हैं, जिससे आर्थिक संकट और गहरा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ईंधन की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
क्षेत्रीय तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संकट और समुद्री बीमा की बढ़ती लागत मुख्य कारण हैं।
2. क्या हूती क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ी हैं?
अभी तक हूती नियंत्रित क्षेत्रों में कीमतों में उतनी तीव्र वृद्धि नहीं देखी गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नए आयात के साथ इसका असर वहां भी पड़ेगा।