एक टेक्सास की माँ, जेसिका ट्रेविनो, को वैध डीएसीए संरक्षण होने के बावजूद मेक्सिको भेजा गया और उन्होंने अमेरिकी सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। यह मामला डीएसीए प्राप्तकर्ताओं के खिलाफ बढ़ते दबाव को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु
- जेसिका ट्रेविनो को वैध डीएसीए होने के बावजूद मेक्सिको में निर्वासित किया गया।
- वह फेडरल अदालत में सरकार के विरुद्ध अपील दर्ज कर रही हैं, जिससे उसकी डीएसीए स्थिति बरकरार रहे।
- यह घटना डीएसीए प्राप्तकर्ताओं पर बढ़ते प्रतिबंधों और उनके बच्चों पर प्रभाव को उजागर करती है।
टेक्सास की 34‑साल की माँ जेसिका ट्रेविनो को दिसंबर 2025 में दक्षिण टेक्सास के होम डिपो पार्किंग में फेडरल एजेंटों ने पकड़ा और मेक्सिको के माटामोरोस में निर्वासित कर दिया गया, जबकि उनके तीन अमेरिकी नागरिक बच्चों को सीमा के पास रहने वाले रिश्तेदारों द्वारा देखभाल मिल रही है।
ट्रेविनो ने 7 साल की उम्र में संयुक्त राज्य में प्रवेश किया और 20 साल की उम्र में डीएसीए (Deferred Action for Childhood Arrivals) के तहत रहने की अनुमति प्राप्त की। यह कार्यक्रम कानूनी स्थायी स्थिति नहीं देता, पर लाखों युवा प्रवासियों को अस्थायी सुरक्षा और कार्य परमिट प्रदान करता है।
जुलाई 2026 में यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने ट्रेविनो को “अनधिकृत यात्रा” के कारण उसकी डीएसीए स्थिति समाप्त करने का नोटिस भेजा। उसी दिन डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने उसे निर्वासित किया, जबकि डीएसीए धारक को निर्वासन से बचाने के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia analysis shows that this case could set a legal precedent for countless DACA families, highlighting a systematic effort to undermine the program by targeting individuals and using procedural loopholes.
“डिएसीए की सुरक्षा को हटाना एक व्यवस्थित नीति है, जो कई परिवारों को अलग‑अलग कर रही है,” कहा इमिग्रेशन विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या डीएसीए स्थिति को हटाया जा सकता है यदि व्यक्ति ने अनधिकृत यात्रा की हो?
उत्तर: कानून में अनधिकृत यात्रा के कारण डीएसीए रद्द किया जा सकता है, पर यह प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
प्रश्न 2: यदि डीएसीए रद्द हो जाए तो क्या व्यक्ति को पुनः निर्वासित किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, डीएसीए रद्द होने पर व्यक्ति को इमीग्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा निर्वासित किया जा सकता है, जैसा कि इस मामले में हुआ।