विदेशी सचिव विक्रम मिस्री की थिम्पु यात्रा में 12 नई परियोजनाओं के अनुमोदन और ₹4,000 crore की लाइन‑ऑफ़‑क्रेडिट समझौता हुआ, जिससे दो देशों के विकास संबंधों में नई ऊर्जा आई।
मुख्य बिंदु
- भारत ने भूटान के 13वें पंचवर्षीय योजना के लिए ₹10,000 crore का समर्थन जारी रखा।
- ₹332 crore के 12 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, जिनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और कृषि शामिल हैं।
- ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 crore की लाइन‑ऑफ़‑क्रेडिट समझौता किया गया।
विदेशी सचिव विक्रम मिस्री ने थिम्पु में दो‑दिन की यात्रा के दौरान भूटान के राजा जिग्मे खेसर नम्ग्येल वांगचुंक, प्रधानमंत्री डैशो त्सरिंग टॉब्गे और विदेश मंत्री लियोनपो डी.एन. धुंग्येल से मुलाकात की। इस दौरे में दोनों पक्षों ने विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार‑निवेश, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों पर विस्तृत चर्चा की।
दौरे के दौरान 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जिनका कुल मूल्य ₹332 crore है। ये परियोजनाएँ बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शहरी सुविधाएँ और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करती हैं। साथ ही, थिम्पु इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का वर्चुअल उद्घाटन किया गया, जो भारत के वित्तीय सहयोग से विकसित हुए हैं।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत‑भूटान के पारस्परिक संबंध 1970 के दशक से निरंतर मजबूत होते आए हैं। 1988 में दो देशों ने आर्थिक सहयोग समझौता किया, जिसके बाद कई बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाएँ सफलतापूर्वक पूरी हुईं। इस बार का समझौता दोनों देशों के 13वें पंचवर्षीय योजना (2024‑2029) के तहत पहले से जारी ₹10,000 crore के समर्थन को सुदृढ़ करता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the expanded portfolio of projects and the massive LoC agreement signal a strategic deepening of India’s influence in the Himalayan region, counterbalancing other regional powers while fostering sustainable development in Bhutan.
"भूटान के ग्रीन मोबिलिटी पहल में भारत का योगदान इस साझेदारी की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है," कहा गया है अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. रीना सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस LoC समझौते से भूटान की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: भारत‑भूटान के बीच नई ऊर्जा परियोजनाएँ और वित्तीय सहायता भूटान को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर तेज़ी से ले जाएँगी, जिससे उसकी ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
प्रश्न 2: क्या यह सहयोग अन्य दक्षिण एशियाई देशों में भी दोहराया जाएगा?
उत्तर: संभावित है; भारत की इस मॉडल को सफल मानते हुए, वह नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ समान समझौतों की खोज में है।