कनाडा के कैलगरी में सैकड़ों भारतीय छात्र पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट (PGWP) खारिज होने के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। कई छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे कनाडा के आव्रजन नियमों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्य बातें
- पोर्टेज कॉलेज से जुड़े कार्यक्रमों के बाद छात्रों के वर्क परमिट आवेदन खारिज किए गए।
- लगभग 480 छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हैं, जिनमें से अधिकांश पंजाब से हैं।
- छात्रों ने भारी ट्यूशन फीस (करीब 20 लाख रुपये) भरने के बाद रोजगार के अवसरों के छीन जाने का आरोप लगाया है।
- अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने छात्रों को मिलने वाली भ्रामक जानकारी पर चिंता जताई है।
कनाडा के कैलगरी में भारतीय छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। पोर्टेज कॉलेज से जुड़े कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद, कई छात्रों को पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) देने से इनकार कर दिया गया है। यह मामला अब केवल व्यक्तिगत रिजेक्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कैलगरी के सैडलटाउन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल में बदल गया है।
आरोप है कि छात्रों ने दो साल के कार्यक्रमों के लिए लगभग 32,000 कनाडाई डॉलर (करीब 20 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस चुकाई थी। छात्रों का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि कोर्स पूरा करने के बाद वे वर्क परमिट के पात्र होंगे। हालांकि, अब उनके आवेदनों को इस आधार पर खारिज किया जा रहा है कि उनके कोर्स 'नॉन-क्रेडिट' श्रेणी में आते हैं, जो वर्क परमिट के लिए योग्य नहीं हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल कुछ छात्रों का नहीं, बल्कि कनाडा की बदलती आव्रजन नीतियों और शिक्षा के व्यवसायीकरण के बीच के टकराव का प्रतीक है। यदि सैकड़ों छात्रों का भविष्य अनिश्चित रहता है, तो यह भारत और कनाडा के बीच शैक्षिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।
"यह विवाद छात्रों के विश्वास और कनाडा के सख्त होते आव्रजन नियमों के बीच एक गहरी खाई को दर्शाता है।"
पोर्टेज कॉलेज ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि वर्क परमिट का निर्णय पूरी तरह से इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) का है, कॉलेज का नहीं। वहीं, अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने भी संकेत दिया है कि कुछ छात्रों को स्थायी निवास (PR) के बारे में भ्रामक जानकारी दी गई होगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में, कनाडा ने अपनी आव्रजन नीतियों में बड़े बदलाव किए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके। पहले कई ऐसे पाठ्यक्रम उपलब्ध थे जो वर्क परमिट के लिए पात्र थे, लेकिन नए नियमों के तहत कई 'नॉन-क्रेडिट' कार्यक्रमों को इस सूची से बाहर कर दिया गया है, जिससे वर्तमान में भारतीय छात्र संकट में हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. छात्र किस बात का विरोध कर रहे हैं?
छात्र अपने पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदनों के खारिज होने के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
2. प्रभावित छात्रों ने कितनी फीस भरी है?
रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने अपने दो साल के कोर्स के लिए लगभग 32,000 कनाडाई डॉलर खर्च किए हैं।