इराक में स्थित ईरानी कुर्द विपक्षी दलों को ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कई समूहों ने अमेरिका से मदद मिलने की खबरों का खंडन किया है, लेकिन युद्ध की स्थिति ने उन्हें सीधे मोर्चे पर ला खड़ा किया है।
मुख्य बातें
- ईरान ने इराक में कुर्द समूहों के मुख्यालयों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
- कुर्द नेताओं ने अमेरिका या अन्य देशों से किसी भी सैन्य सहायता मिलने से इनकार किया है।
- इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार ने स्थानीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए इन समूहों से संयम बरतने को कहा है।
- ईरानी कुर्द समूहों का मानना है कि अमेरिका का असली लक्ष्य शासन परिवर्तन नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में ईरान के प्रभाव को कम करना है।
इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र में स्थित ईरानी कुर्द विपक्षी दल वर्तमान में एक अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहे हैं। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने इन समूहों को युद्ध की अग्रिम पंक्ति में धकेल दिया है। इन समूहों के मुख्यालय और सैन्य ठिकाने अब सीधे तौर पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बन रहे हैं।
युद्ध की बदलती परिस्थितियाँ और सैन्य हमले
कोमाला पार्टी (Komala Party) के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य काको एलयार ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। उन्होंने खुलासा किया कि पार्टी से जुड़े कम से कम 13 लड़ाके ईरानी हमलों में मारे जा चुके हैं। ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है और सीमावर्ती इलाकों में भारी सैन्य तैनाती की है, जिससे कुर्द लड़ाकों के लिए जोखिम काफी बढ़ गया है।
BozokMedia विश्लेषण: भू-राजनीतिक जोखिम
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि ये हमले केवल सैन्य कार्रवाई नहीं हैं, बल्कि ईरान द्वारा अपने आंतरिक विद्रोह को दबाने और सीमा पार सक्रिय समूहों को खत्म करने की एक सोची-समझी रणनीति है। इराक का कुर्द क्षेत्र एक ऐसे दोराहे पर है जहाँ एक तरफ ईरान की आक्रामकता है और दूसरी तरफ अमेरिका की अनिश्चित नीतियां।
ईरानी कुर्द समूहों के लिए यह युद्ध एक दोधारी तलवार की तरह है; वे शासन परिवर्तन की उम्मीद तो रखते हैं, लेकिन बिना किसी ठोस विदेशी सैन्य समर्थन के भारी नुकसान का डर भी बना हुआ है।
विपक्षी कुर्द नेताओं, जैसे कि कुर्दता स्वतंत्रता पार्टी (Kurdish Freedom Party) के नेता रेबाज शरीफी, ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उन्हें अमेरिका से हथियार मिल रहे हैं। शरीफी का मानना है कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के शासन को उखाड़ फेंकना नहीं, बल्कि केवल मध्य पूर्व में उसकी शक्ति को कम करना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1990 के दशक में खाड़ी युद्ध के बाद उत्तरी इराक में नो-फ्लाई ज़ोन के निर्माण और कुर्द स्वायत्तता के उदय ने इन समूहों को फलने-फूलने का मौका दिया। 2003 में इराक पर अमेरिकी आक्रमण के बाद ये समूह और भी अधिक मजबूत हुए, जिससे उन्हें ईरान की सीमा के पास सुरक्षित ठिकाने मिले।
Frequently Asked Questions
1. क्या कुर्द समूहों को अमेरिका से सैन्य सहायता मिल रही है?
कुर्द नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें अमेरिका, यूरोप या अरब देशों से कोई सैन्य सहायता नहीं मिल रही है।
2. ईरान इन हमलों को क्यों कर रहा है?
ईरान इन हमलों को 'ईरान विरोधी अलगाववादी ताकतों' के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा हैं।