विशेषज्ञों का तर्क है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' गाजा में शांति स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा है और अब इसे समाप्त कर जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र को वापस सौंपनी चाहिए।

मुख्य बातें

  • बोर्ड ऑफ पीस के पास न तो प्रवर्तन शक्ति है और न ही पर्याप्त कानूनी आधार।
  • इजरायली विस्तारवाद और गाजा में मानवीय संकट पर बोर्ड की चुप्पी चिंताजनक है।
  • बोर्ड के पास पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक धन का भारी अभाव है।
  • विशेषज्ञों का सुझाव है कि फिलिस्तीनी मुद्दे को वापस UN ढांचे में लाया जाना चाहिए।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि हमास गाजा में युद्धविराम समझौते के अगले चरण के लिए तैयार है। हालांकि, इस 'ऐतिहासिक समझौते' के पीछे की वास्तविकता कहीं अधिक जटिल और निराशाजनक है। वास्तविकता यह है कि हमास ने हथियारों के त्याग को इजरायल द्वारा समझौते के दायित्वों को पूरा करने से जोड़ दिया है, जिसमें इजरायल अब तक विफल रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए बनाया गया 'बोर्ड ऑफ पीस' अब तक पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। छह महीने के अस्तित्व के बाद भी, इस संस्था के पास न तो शांति लागू करने की शक्ति है, न ही इसके पास कोई ठोस वित्तीय संसाधन या अंतरराष्ट्रीय कानूनी स्थिति है। इसके बजाय, यह बोर्ड केवल एक कूटनीतिक दिखावा बनकर रह गया है, जो गाजा में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई को राजनीतिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बोर्ड ऑफ पीस का वर्तमान स्वरूप गाजा के पुनर्निर्माण के बजाय वहां के भू-राजनीतिक परिदृश्य को बदलने की कोशिश कर रहा है। बोर्ड द्वारा फिलिस्तीनी संपत्तियों को जब्त करने का प्रयास और इजरायली सैन्य नियंत्रण को मौन स्वीकृति देना, इस संस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बोर्ड ऑफ पीस शांति स्थापित करने के बजाय, मौजूदा कब्जे को वैध बनाने का एक साधन मात्र बन गया है।

बोर्ड की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण इसकी वित्तीय स्थिति है। हालांकि अरबों डॉलर के वादे किए गए थे, लेकिन वर्ल्ड बैंक का खाता खाली पड़ा है। वर्तमान में, यह संस्था केवल कुछ मिलियन डॉलर पर निर्भर है, जिसका उपयोग पुनर्निर्माण के बजाय प्रशासनिक खर्चों और वेतन में किया जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना अक्टूबर में घोषित ट्रंप के 20-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के अनुच्छेद 9 के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य एक तकनीकी निकाय और अंतरराष्ट्रीय शांति सेना (ISF) के माध्यम से गाजा का प्रबंधन करना था, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

क्या आप जानते हैं?: युद्धविराम शुरू होने के बाद से इजरायल ने गाजा के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया है, जो पहले केवल 53 प्रतिशत था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य गाजा का पुनर्निर्माण करना और इजरायल की क्रमिक वापसी की निगरानी करना था।

2. संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
संयुक्त राष्ट्र के पास अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कानूनी मान्यता और निष्पक्षता है, जो इस बोर्ड में नहीं है।