बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन के आगमन से पहले चीन ने भारत के भीतर फालुंगोन्ग और तिब्बती‑संबंधित मीडिया गृहों पर प्रतिबंध लगाने की सख्त मांग की है। यह कदम चीन‑भारत संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों देशों की छवि को प्रभावित कर सकता है।
मुख्य बिंदु
- चीन ने भारत में फालुंगोन्ग और तिब्बती‑संबंधित मीडिया पर प्रतिबंध की मांग की।
- यह दबाव बीआरआईसीएस 2024 शिखर सम्मेलन की तैयारी के दौर में आया है।
- भारत‑चीन रिश्तों में यह नया तनाव दोनों देशों के राजनयिक संतुलन को चुनौती देगा।
बीआरआईसीएस (ब्रिक्स) शिखर सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से कुछ हफ्ते पहले, बीजिंग ने भारत सरकार को फालुंगोन्ग और तिब्बत‑संबंधित मीडिया संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है। चीन का यह कदम स्रोतों के अनुसार, उन मीडिया प्लेटफॉर्मों को ‘विदेशी प्रभाव’ के रूप में देखता है, जो चीन की आंतरिक नीतियों को चुनौती दे सकते हैं।
नई दिल्ली ने इस अनुरोध को तुरंत खारिज नहीं किया, परंतु विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की प्रेस स्वतंत्रता संविधान द्वारा सुरक्षित है। भारतीय सरकार ने इस मुद्दे को राजनयिक वार्तालापों में रखकर, बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन को प्राथमिकता दी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
फालुंगोन्ग को 1999 में चीन ने एक ‘कैटेस्टिक’ आंदोलन घोषित किया और उसके बाद से देश में इस समूह से जुड़ी कई मीडिया आउटलेट्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। तिब्बत‑संबंधी रिपोर्टिंग भी अक्सर बीजिंग के साथ तनाव पैदा करती रही है, विशेषकर जब यह निकटवर्ती देशों में स्वतंत्रता‑संबंधी मुद्दों को उजागर करती है।
पिछले साल भी, चीन ने दक्षिण एशिया के कई देशों को समान दबाव डाला था, जिससे भारत‑चीन आर्थिक सहयोग में हल्की गिरावट देखी गई थी। इस बार, शिखर सम्मेलन की महत्ता को देखते हुए, दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक वार्ता और भी जटिल हो गई है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि भारत इस दबाव को स्वीकार करता है, तो यह न केवल प्रेस‑स्वतंत्रता को कमजोर करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की लोकतांत्रिक छवि को भी धूमिल कर सकता है। साथ ही, यह बीआरआईसीएस के सहयोगी देशों को संकेत देगा कि चीन अपने राजनयिक एजेंडा को आर्थिक साझेदारी से ऊपर रख रहा है।
"आधुनिक राजनयिक खेल में मीडिया स्वतंत्रता एक रणनीतिक हथियार बन गई है, और इसका दुरुपयोग दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों को नुकसान पहुँचा सकता है," कहा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर डॉ. रवींद्र सिंह ने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या चीन ने आधिकारिक तौर पर कोई प्रस्ताव भेजा है? हाँ, बीजिंग ने भारत को राजनयिक नोट के माध्यम से प्रतिबंध की मांग भेजी है।
- भारत की प्रतिक्रिया क्या रही है? भारतीय सरकार ने प्रेस स्वतंत्रता के सिद्धांत को दोहराते हुए, इस मांग को अस्वीकार किया है और शिखर सम्मेलन की सफलता पर ध्यान केंद्रित किया है।