एक नए सर्वेक्षण ने खुलासा किया है कि ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में गैर-श्वेत और प्रवासी चिकित्सा कर्मचारियों के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार और भेदभाव में भारी वृद्धि हुई है।

मुख्य बातें

  • NHS में गैर-श्वेत कर्मचारियों के खिलाफ नस्लीय अपमान और गाली-गलौज की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
  • मरीज अब गैर-श्वेत डॉक्टरों द्वारा इलाज कराने से इनकार कर रहे हैं।
  • भारतीय मूल के लगभग 45,000 डॉक्टर NHS की रीढ़ हैं, जो अब इस भेदभाव का सामना कर रहे हैं।
  • पेशेवर संस्थाएं अब NHS ट्रस्टों से सख्त कार्रवाई और बेहतर रिकॉर्डिंग की मांग कर रही हैं।

यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में काम कर रहे गैर-श्वेत चिकित्सा कर्मचारियों के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार और भेदभाव की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखी गई है। हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रवासी डॉक्टरों और नर्सों को काम के दौरान अपमानजनक भाषा और नस्लवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है।

सर्वेक्षण में पाया गया कि कर्मचारियों को "गंदे विदेशी" और अन्य अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जा रहा है। सोसाइटी ऑफ रेडियोगाफर्स (SoR) ने बताया कि पिछले 18 महीनों में ऐसी घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, कुछ मरीज अब गैर-श्वेत चिकित्सा पेशेवरों द्वारा इलाज किए जाने से स्पष्ट रूप से इनकार कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के लिए एक गंभीर चुनौती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल व्यक्तिगत घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह बढ़ते राजनीतिक और मीडिया नैरेटिव का परिणाम है जो प्रवासियों के खिलाफ शत्रुता पैदा कर रहा है। NHS की ताकत उसकी विविधता है, और यदि इस विविधता को सुरक्षित नहीं रखा गया, तो स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

"पिछले डेढ़ साल में नस्लवाद की घटनाओं में वृद्धि अस्वीकार्य है और यह समाज के रूप में हमारी विफलता को दर्शाती है।" - डीन रोजर्स, कार्यकारी निदेशक, SoR

विशेष रूप से, भारतीय मूल के चिकित्सा पेशेवर NHS का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लगभग 45,000 भारतीय मूल के डॉक्टर NHS में कार्यरत हैं। सर्वेक्षण में एक एशियाई मूल की सोनोग्राफर ने बताया कि मरीज अक्सर यह कहकर टिप्पणी करते हैं कि "विदेशी लोग आकर हमारी नौकरियां छीन रहे हैं," जो मीडिया और कुछ राजनीतिक दलों द्वारा फैलाए जा रहे विमर्श का प्रतिबिंब है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

NHS की स्थापना 1948 में हुई थी और यह अपनी विविधता के लिए जानी जाती है। पिछले कुछ दशकों में, वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित डॉक्टरों, विशेष रूप से भारत और अन्य राष्ट्रमंडल देशों से, NHS की सेवा क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या आप जानते हैं?: NHS के कुल कार्यबल का लगभग 21 प्रतिशत गैर-ब्रिटिश नागरिक हैं, जो इसे दुनिया के सबसे विविध स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सर्वेक्षण के अनुसार मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या गैर-श्वेत कर्मचारियों के खिलाफ बढ़ता नस्लीय अपमान, गाली-गलौज और मरीजों द्वारा इलाज से इनकार करना है।

2. भारतीय डॉक्टरों की NHS में क्या भूमिका है?
भारतीय मूल के लगभग 45,000 डॉक्टर NHS में कार्यरत हैं, जो स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में अपरिहार्य भूमिका निभाते हैं।