भारत सरकार ने लोकसभा में स्वीकार किया है कि कनाडा द्वारा पूर्व विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों और अन्य सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के वीजा प्रसंस्करण में देरी की जा रही है। केंद्र ने इस मामले को ओटावा के समक्ष उठाया है।

मुख्य बातें

  • कनाडा द्वारा सेवानिवृत्त भारतीय अधिकारियों के वीजा में देरी की समस्या सामने आई है।
  • विदेश मंत्रालय के पूर्व कर्मियों को विशेष रूप से प्रभावित किया गया है।
  • भारत सरकार ने इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर कनाडा के साथ उठाया है।
  • सरकार पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार के लिए भी नए कदम उठा रही है।

नई दिल्ली में आयोजित लोकसभा सत्र के दौरान, केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि सरकार उन विशिष्ट मामलों से अवगत है जहां कनाडा द्वारा सेवानिवृत्त भारतीय सरकारी अधिकारियों के वीजा आवेदनों के प्रसंस्करण में देरी की जा रही है।

इस देरी का सबसे अधिक प्रभाव उन पूर्व विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों पर पड़ा है, जिन्होंने पहले कनाडा में सेवा दी थी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं है, बल्कि एक गंभीर विषय है जिसे आधिकारिक तौर पर ओटावा के साथ चर्चा के लिए उठाया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत वीजा देरी का नहीं है, बल्कि यह भारत और कनाडा के बीच मौजूदा कूटनीतिक तनाव का एक प्रतिबिंब हो सकता है। पूर्व राजनयिकों के वीजा में देरी द्विपक्षीय संबंधों में एक संवेदनशील मोड़ का संकेत देती है।

पूर्व राजनयिकों के वीजा में देरी द्विपक्षीय संबंधों में कूटनीतिक तनाव का एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण संकेत है।

दूसरी ओर, सरकार ने पासपोर्ट सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। वर्तमान में देश भर में 93 पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) और 456 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) कार्यरत हैं। सरकार ने 'कहीं भी आवेदन करें' (Apply Anywhere in India) जैसी योजनाएं भी शुरू की हैं ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सुविधा हो सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और कनाडा के बीच हाल के वर्षों में राजनयिक संबंधों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। वीजा प्रक्रियाओं में देरी और राजनयिकों के बीच तनाव ने दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाया है, जो अब सेवानिवृत्त अधिकारियों के व्यक्तिगत मामलों तक पहुंच गया है।

क्या आप जानते हैं?: भारत सरकार ने अब 'पासपोर्ट मोबाइल वैन' भी तैनात की हैं, जो पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों के पासपोर्ट का काम करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. किन अधिकारियों को सबसे अधिक प्रभावित किया गया है?
मुख्य रूप से वे पूर्व MEA अधिकारी जिन्होंने कनाडा में कार्य किया है और अन्य सेवानिवृत्त केंद्रीय सरकारी कर्मचारी।

2. सरकार ने इस पर क्या कार्रवाई की है?
सरकार ने इस मुद्दे को कूटनीतिक माध्यमों से कनाडा सरकार (ओटावा) के समक्ष उठाया है।