हूतियों द्वारा यमन सरकार की सेना पर किए गए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों ने देश को एक नए और भीषण युद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया है। हद्रमौत और मारिब में हुए इन हमलों में दर्जनों सैनिकों की मौत के बाद शांति की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं।
मुख्य बातें
- हूतियों ने हद्रमौत और मारिब में सरकारी सैन्य शिविरों पर बड़े हमले किए।
- इस हमले में कम से कम 30 सरकारी सैनिकों की मौत की खबर है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यमन में लंबे समय के बाद एक पूर्ण युद्ध शुरू हो सकता है।
- हूती समूह ने सऊदी अरब की सैन्य गतिविधियों का हवाला देते हुए हमले को जायज ठहराया है।
यमन में शांति की उम्मीदें एक बार फिर ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आ रही हैं। गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने यमन के भीतर सरकारी सेना के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से भीषण हमला किया। इस हमले ने न केवल सैन्य शिविरों को तबाह कर दिया, बल्कि हद्रमौत और मारिब जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई।
हूती सैन्य प्रवक्ता याहया सरे ने एक टेलीविजन प्रसारण के दौरान दावा किया कि इन हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और कई महत्वपूर्ण डिपो नष्ट हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सऊदी अरब द्वारा की जा रही कथित सैन्य लामबंदी के जवाब में की गई है। पिछले कुछ वर्षों से यमन में जारी संघर्ष में अब एक नया और अधिक हिंसक मोड़ आ गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यमन में 'न शांति, न युद्ध' की जो स्थिति बनी हुई थी, वह अब समाप्त हो रही है। हूती समूह का ध्यान अब केवल स्थानीय संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि वे लाल सागर में जहाजों पर हमले और सऊदी अरब के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी सक्रियता बढ़ाकर क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
यमन में शांति की संभावनाएं अब केवल एक चमत्कार पर टिकी हैं, क्योंकि दोनों पक्ष प्रतिशोध की भावना से भरे हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय संकट समूह के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी के अनुसार, हूतियों द्वारा सीमा पार हमलों का विस्तार इस बात का संकेत है कि पूर्ण युद्ध का खतरा अब दूर नहीं है। हालांकि 2022 में एक संयुक्त राष्ट्र समर्थित युद्धविराम हुआ था, लेकिन हालिया घटनाक्रम बताते हैं कि दोनों पक्ष अब निर्णायक सैन्य मुकाबले के लिए तैयार हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यमन का यह संघर्ष 2014 में शुरू हुआ था जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके जवाब में 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार का समर्थन किया। वर्षों तक जारी इस संघर्ष ने देश को मानवीय संकट की गहरी खाई में धकेल दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: हालिया हमले कहाँ हुए हैं?
उत्तर: ये हमले मुख्य रूप से यमन के हद्रमौत और मारिब प्रांतों में सरकारी सैन्य शिविरों पर किए गए हैं।
प्रश्न 2: क्या शांति समझौता संभव है?
उत्तर: विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान सैन्य वृद्धि के कारण शांति की संभावनाएं बेहद कम हो गई हैं।