फ्रांसीसी सैनिकों द्वारा 1916 में लूटे गए आइवरी कोस्ट के पवित्र 'डिडजी अयोक्वे' (टॉकिंग ड्रम) को एक शताब्दी से अधिक समय के बाद उसके मूल गांव में वापस लौटा दिया गया है।
मुख्य बातें
- 1916 में फ्रांसीसी सैनिकों द्वारा पवित्र 'डिडजी अयोक्वे' ड्रम को लूटा गया था।
- 110 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इसे आइवरी कोस्ट के एब्री समुदाय को लौटाया गया है।
- यह ड्रम ऐतिहासिक रूप से संदेश भेजने और खतरों की चेतावनी देने के लिए उपयोग किया जाता था।
आइवरी कोस्ट के इतिहास में एक भावुक क्षण तब आया जब डिडजी अयोक्वे (Djidji Ayokwe), जिसे स्थानीय रूप से 'टॉकिंग ड्रम' के रूप में जाना जाता है, एक सदी से अधिक समय के बाद अपने मूल गांव वापस लौट आया। यह पवित्र वाद्य यंत्र 1916 में फ्रांसीसी औपनिवेशिक सैनिकों द्वारा लूटा गया था और तब से यह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर था।
एब्री समुदाय के लिए, यह केवल एक वाद्य यंत्र नहीं है, बल्कि उनके पूर्वजों की आवाज है। ऐतिहासिक रूप से, इस ड्रम का उपयोग संदेश प्रसारित करने, महत्वपूर्ण घोषणाएं करने और गांव को संभावित खतरों के प्रति सचेत करने के लिए किया जाता था। फरवरी में फ्रांस द्वारा इसकी आधिकारिक वापसी के बाद, अब यह फिर से अपनी मिट्टी में समा गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक वस्तु की वापसी नहीं है, बल्कि यह अफ्रीका में सांस्कृतिक पुनर्प्राप्ति और औपनिवेशिक विरासत के न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम है। कई अफ्रीकी देश अपनी लूटी गई कलाकृतियों की वापसी के लिए दशकों से संघर्ष कर रहे हैं।
सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी समुदायों के आत्मसम्मान और उनकी पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए अनिवार्य है।
ऐतिहासिक रूप से, इस प्रकार की लूट औपनिवेशिक शासन के दौरान व्यापक थी, जहां कलाकृतियों को 'जीत के प्रतीक' के रूप में यूरोप ले जाया जाता था। इस ड्रम की वापसी उस घाव को भरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'टॉकिंग ड्रम' का क्या महत्व है?
उत्तर: यह एब्री समुदाय में संचार का एक माध्यम था, जिसका उपयोग संदेश भेजने और चेतावनी देने के लिए किया जाता था।
प्रश्न 2: यह ड्रम कब लूटा गया था?
उत्तर: इसे 1916 में फ्रांसीसी सैनिकों द्वारा लूटा गया था।