श्रीलंका सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए भारत में रह रहे उन शरणार्थियों को वापस आने की अनुमति दी है, जो युद्ध के दौरान बिना वैध पासपोर्ट के देश से बाहर निकले थे। यह कदम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंताओं के बीच उठाया गया है।

मुख्य बिंदु

  • श्रीलंका सरकार अब बिना वैध पासपोर्ट वाले शरणार्थियों को वापसी की अनुमति देगी।
  • वापस आने वाले व्यक्तियों को अपनी श्रीलंकाई नागरिकता प्रमाणित करनी होगी।
  • यह निर्णय युद्ध के दौरान अनधिकृत रास्तों से निकले लोगों के लिए राहत लेकर आया है।
  • सुरक्षा कारणों से खुफिया विभाग द्वारा गहन जांच की जाएगी।

कोलंबो: श्रीलंका ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करते हुए उन शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं जो युद्ध के दौरान बिना वैध पासपोर्ट या अनधिकृत बंदरगाहों के माध्यम से देश छोड़कर भारत चले गए थे। श्रीलंका कैबिनेट ने सोमवार को बैठक के दौरान यह निर्णय लिया कि जो लोग अपनी मातृभूमि में स्वेच्छा से वापस आना चाहते हैं, उन्हें आव्रजन (immigration) की सुविधा प्रदान की जाएगी।

यह निर्णय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा पिछले वर्ष कुछ शरणार्थियों को हिरासत में लिए जाने के बाद जताई गई चिंताओं के जवाब में आया है। विशेष रूप से, मई 2025 में एक 75 वर्षीय शरणार्थी की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जुलाई 2025 से फरवरी 2026 के बीच लौटे 246 लोगों में से किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम न केवल मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में शरणार्थी संकट के समाधान की दिशा में एक कूटनीतिक कदम भी है। भारत के तमिलनाडु में रह रहे लगभग 89,000 श्रीलंकाई तमिलों के लिए यह नीति एक नई उम्मीद लेकर आई है।

यह नीतिगत बदलाव युद्ध की कड़वी यादों और वर्तमान मानवीय आवश्यकताओं के बीच एक सेतु का काम करेगा।

वापसी की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार ने सख्त प्रोटोकॉल भी निर्धारित किए हैं। इसमें पहचान का सत्यापन, श्रीलंका की राज्य खुफिया सेवा (State Intelligence Service) से मंजूरी, और भारत में श्रीलंकाई राजनयिक मिशनों के माध्यम से नागरिकता का प्रमाणीकरण शामिल है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि व्यक्ति ने हत्या या देशद्रोह जैसे गंभीर अपराध न किए हों।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्रीलंका का गृहयुद्ध दशकों तक चला, जिसके कारण हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए भारत के विभिन्न राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु में शरण लेने को मजबूर हुए। इनमें से कई के पास आधिकारिक दस्तावेज़ नहीं थे, जिससे उनके भविष्य पर हमेशा संकट बना रहा।

क्या आप जानते हैं?: तमिलनाडु में रहने वाले लगभग 40% शरणार्थी वहीं पैदा हुए हैं, जिन्होंने कभी श्रीलंका नहीं देखा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या बिना पासपोर्ट वाले लोग वापस आ सकते हैं?
हाँ, यदि वे अपनी श्रीलंकाई नागरिकता प्रमाणित कर सकें और स्वेच्छा से लौट रहे हों।

प्रश्न 2: क्या सुरक्षा जांच अनिवार्य है?
हाँ, खुफिया विभाग और राजनयिक मिशनों द्वारा गहन जांच की जाएगी।