लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दक्षिण लेबनान में इजरायली हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। उन्होंने इजरायल के उन दावों को भी खारिज कर दिया जिसमें नष्ट किए गए गांवों को सैन्य ठिकाना बताया गया था।

मुख्य बातें

  • प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
  • इजरायल के 'सैन्य ठिकानों' के दावों को लेबनान सरकार ने पूरी तरह खारिज किया।
  • लेबनान में अब तक 4,333 लोग मारे जा चुके हैं और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
  • अमेरिका ने दोनों पक्षों से समझौते के ढांचे के भीतर काम करने की अपील की है।

लेबनान की सरकार ने इजरायल पर देश के दक्षिणी हिस्सों में घरों और नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर नष्ट करने का आरोप लगाया है। प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने बुधवार को एक कड़ा बयान देते हुए कहा कि इजरायल के हमले, घुसपैठ और घरों का व्यवस्थित विनाश अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।

प्रधानमंत्री सलाम ने उन दावों को सिरे से नकार दिया जिनमें इजरायल ने कहा था कि नष्ट किए गए गांव वास्तव में सैन्य ठिकाने थे। उन्होंने कहा कि यह तर्क किसी भी तर्कसंगतता पर खरा नहीं उतरता और इसका उपयोग लोगों को विस्थापित करने और उन्हें वापस लौटने से रोकने के लिए एक बहाने के रूप में नहीं किया जा सकता।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि लेबनान और इजरायल के बीच चल रहा यह तनाव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है। हालांकि एक अमेरिकी मध्यस्थता वाले युद्धविराम की बात की गई थी, लेकिन इजरायली सेना का दक्षिणी लेबनान के गांवों में बने रहना और हमले जारी रखना इस शांति प्रक्रिया को बेहद कमजोर बना रहा है।

इजरायल द्वारा नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध के नियमों की अनदेखी है, जो भविष्य में बड़े कानूनी विवादों को जन्म दे सकता है।

इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने हाल ही में दक्षिण लेबनान का दौरा किया और कहा कि इजरायली सेना वहां के भूमिगत बुनियादी ढांचे और घरों को नष्ट कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायली सेना लेबनान, सीरिया या गाजा के कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

लेबनान मार्च 2026 से इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में खिंच गया था। अप्रैल में एक युद्धविराम समझौते के बावजूद, इजरायली सेना अभी भी दर्जनों गांवों पर कब्जा जमाए हुए है। जून में वाशिंगटन में एक समझौता हुआ था जिसके तहत इजरायली सेना को धीरे-धीरे पीछे हटना था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।

क्या आप जानते हैं?: लेबनान की लगभग 20% आबादी, यानी 10 लाख से अधिक लोग, युद्ध के कारण अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. लेबनान सरकार का इजरायल पर मुख्य आरोप क्या है?
लेबनान सरकार का आरोप है कि इजरायल जानबूझकर नागरिक घरों और बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रहा है ताकि लोगों को विस्थापित किया जा सके।

2. वर्तमान युद्धविराम की स्थिति क्या है?
युद्धविराम कागजों पर तो है, लेकिन इजरायली सैन्य कार्रवाइयां और घुसपैठ लगातार जारी है, जिससे शांति प्रक्रिया खतरे में है।