नॉर्वे के विदेश मंत्री के पाकिस्तान दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी अशांति पर उन्होंने चुप्पी साध ली। भारत ने स्पष्ट किया है कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मामला है।

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मुख्य बातें

  • नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने पाकिस्तान में जम्मू-कश्मीर पर चर्चा की।
  • पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को 'अंतरराष्ट्रीय मुद्दा' बताने की कोशिश की।
  • PoK में जारी नागरिक विरोध प्रदर्शनों और सैन्य दमन पर नॉर्वे की चुप्पी।
  • भारत ने कश्मीर पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को सिरे से खारिज किया है।

नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे के हालिया पाकिस्तान दौरे ने दक्षिण एशियाई कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। ईडे ने पाकिस्तानी सरकार के साथ जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत की पुष्टि की है, जो भारत के उस सख्त रुख के विपरीत है जिसमें कश्मीर को केवल एक द्विपक्षीय मुद्दा माना गया है।

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने इस बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर को एक 'अनसुलझा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा' बताकर भारत को घेरने का प्रयास किया। उन्होंने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भी भारत पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि भारत पानी को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि नॉर्वे का यह बयान कूटनीतिक रूप से संवेदनशील है। जबकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच का है, नॉर्वे की इस चर्चा ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखने का एक नया अवसर दे दिया है।

भारत की संप्रभुता और कश्मीर पर उसका अडिग रुख किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।

हैरानी की बात यह है कि जहाँ जम्मू-कश्मीर पर चर्चा हुई, वहीं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों और वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे कथित दमन पर नॉर्वे के मंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की। यह चुप्पी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवाल खड़े करती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर का मुद्दा 1947 के विभाजन के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र रहा है। भारत इसे अपना अभिन्न अंग मानता है, जबकि पाकिस्तान इसे संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे का हिस्सा बताता रहा है।

क्या आप जानते हैं?: नॉर्वे एक दशक के लंबे अंतराल के बाद पाकिस्तान का दौरा करने वाला पहला नॉर्वेजियन विदेश मंत्री बना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. भारत का कश्मीर पर क्या रुख है?
भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाजित हिस्सा है और यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है जिसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है।

2. नॉर्वे के विदेश मंत्री ने और किन मुद्दों पर बात की?
उन्होंने ईरान की सुरक्षा, अफगानिस्तान और द्विपक्षीय व्यापार व जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।