पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत को चेतावनी दी है, जिसे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिरे से खारिज करते हुए कश्मीर के जल अधिकारों की बात कही है।

मुख्य बिंदु

  • शहबाज शरीफ ने सिंधु जल को पाकिस्तान के लिए 'रेड लाइन' बताया।
  • भारत ने 2025 में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था।
  • उमर अब्दुल्ला ने कहा कि संधि ने जम्मू-कश्मीर के जल संसाधनों के उपयोग को बाधित किया है।
  • कश्मीर के मुख्यमंत्री ने संधि के निरस्तीकरण का समर्थन किया।

इस्लामाबाद में 'यादगार-ए-फतह' स्मारक के उद्घाटन के दौरान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित करना भारत का एकतरफा और अवैध कदम है। शरीफ ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के पानी की एक-एक बूंद उनके लिए 'रेड लाइन' है और यदि पानी की आपूर्ति को खतरा हुआ, तो इसका सीधा जवाब दिया जाएगा।

गौरतलब है कि भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। यह कदम पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में उठाया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत का स्पष्ट रुख है कि सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ यह एक कड़ा नीतिगत निर्णय है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जल विवाद अब केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। सिंधु नदी प्रणाली का नियंत्रण सीधे तौर पर दोनों देशों की कृषि और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

पानी अब दक्षिण एशिया में कूटनीति का नया हथियार बन चुका है, जहाँ हर बूंद पर अधिकार का संघर्ष बढ़ रहा है।

दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शरीफ के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अब्दुल्ला ने तर्क दिया कि सिंधु जल संधि ने वास्तव में कश्मीर के विकास को रोका है। उन्होंने कहा कि संधि के कारण जम्मू-कश्मीर चेनाब जैसी नदियों से पीने का पानी लेने और बड़े बांध बनाने में असमर्थ रहा है।

अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा, "यह पानी हमारा है... ये हमारी नदियाँ हैं। हमने हमेशा कहा है कि हमारा खून बहाया गया है।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि चूंकि भारत ने संधि को स्थगित कर दिया है, इसलिए इसे रद्द ही रहना चाहिए ताकि कश्मीर अपने जल संसाधनों का पूर्ण उपयोग कर सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सिंधु जल संधि (IWT) 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित हुई थी। इसके तहत पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का नियंत्रण भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) का अधिकार मुख्य रूप से पाकिस्तान को दिया गया था।

क्या आप जानते हैं?: सिंधु जल संधि को दुनिया की सबसे सफल जल संधियों में से एक माना जाता था, जो कई युद्धों के बावजूद कायम रही।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भारत ने सिंधु जल संधि को क्यों स्थगित किया?
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने के कारण यह निर्णय लिया था।

2. उमर अब्दुल्ला का इस पर क्या रुख है?
अब्दुल्ला का मानना है कि संधि ने कश्मीर के जल संसाधनों के उपयोग को सीमित किया है और वे इसके निरस्तीकरण के पक्ष में हैं।