काबुल के शमा-ए-हिदायत स्कूल में हुए एक संदिग्ध ग्रेनेड विस्फोट में कई छात्र घायल हो गए हैं, जिससे हज़ारा बहुल इलाके में तनाव फैल गया है।

  • काबुल के दाश्त-ए-बरची जिले के शमा-ए-हिदायत निजी स्कूल में विस्फोट हुआ।
  • शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल की छुट्टी के समय हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया।
  • कई छात्र घायल हुए जिन्हें अलमी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
  • यह हमला हज़ारा अल्पसंख्यक समुदाय के बहुल इलाके में हुआ है।

सोमवार दोपहर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पश्चिमी जिले में एक निजी शैक्षणिक संस्थान में हुए विस्फोट से सुरक्षा स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई है। यह घटना स्थानीय समय के अनुसार लगभग शाम 4:30 बजे दाश्त-ए-बरची के महदिया पड़ोस में स्थित शमा-ए-हिदायत स्कूल और शैक्षिक केंद्र में हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों और टولوन्यूज (TOLOnews) व काबुल नाउ जैसे स्थानीय समाचार माध्यमों के अनुसार, धमाका ठीक उस समय हुआ जब स्कूल की छुट्टी हो रही थी, जिससे बड़ी संख्या में छात्र इसकी चपेट में आ गए। आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को अलमी अस्पताल पहुँचाया। अफगानिस्तान इंटरनेशनल द्वारा जारी फुटेज में एम्बुलेंस के पास भीड़ जमा देखी जा सकती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हमले का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। दाश्त-ए-बरची मुख्य रूप से हज़ारा अल्पसंख्यक समुदाय का निवास स्थान है, जिसे दशकों से चरमपंथी तत्वों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। स्कूल के समय बच्चों को निशाना बनाना इस समुदाय के भीतर मनोवैज्ञानिक आतंक फैलाने की एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है।

अल्पसंख्यक क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि तालिबान अफगानिस्तान के सभी जातीय समूहों को बुनियादी सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहा है।

हालांकि तालिबान सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन इस हमले का तरीका इस्लामिक स्टेट इन खोरासान प्रांत (ISIS-K) द्वारा किए गए पिछले हमलों से मेल खाता है। ISIS-K का इतिहास रहा है कि वह हज़ारा समुदाय की मस्जिदों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाता रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से अफगानिस्तान के सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव आया है। हालांकि बड़े पैमाने पर शहरी युद्ध कम हुए हैं, लेकिन ISIS-K द्वारा किए गए छिटपुट और घातक हमले बढ़े हैं। मुख्य रूप से शिया मुस्लिम होने के कारण हज़ारा समुदाय इन विद्रोही समूहों का प्राथमिक लक्ष्य बना हुआ है।

क्या आप जानते हैं?: हज़ारा लोग अफगानिस्तान का एक जातीय समूह हैं, जो अपनी विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं और ऐतिहासिक उत्पीड़न के लिए जाने जाते हैं, जिससे वे मध्य एशिया के सबसे हाशिए पर रहने वाले समूहों में से एक बन गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस विस्फोट के लिए किसे जिम्मेदार माना जा रहा है?
हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई दावा नहीं किया गया है, लेकिन हज़ारा बहुल क्षेत्र को निशाना बनाना ISIS-K की कार्यप्रणाली की ओर इशारा करता है।

विस्फोट का कारण क्या था?
टولوन्यूज और काबुल नाउ की रिपोर्टों के अनुसार, यह विस्फोट एक हैंड ग्रेनेड के कारण हुआ था।