डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर 15-सूत्रीय गाजा योजना को आगे बढ़ाएंगे। यह बैठक हमास नेताओं के साथ मिस्र में हुई दुर्लभ चर्चा के ठीक बाद हो रही है।
- जारेड कुशनर इजरायली पीएम नेतन्याहू से मिलकर ट्रंप की 15-सूत्रीय गाजा योजना पेश करेंगे।
- कुशनर ने हाल ही में मिस्र में हमास के राजनीतिक नेतृत्व के साथ एक दुर्लभ बैठक की है।
- योजना में हमास के धीरे-धीरे निरस्त्रीकरण और गाजा के शासन को अंतरराष्ट्रीय बल को सौंपने का प्रस्ताव है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत और दामाद जारेड कुशनर सोमवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करने वाले हैं। इस उच्च-स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य उस 15-सूत्रीय गाजा शांति योजना को लागू करवाना है, जिसे इजरायल ने अब तक खारिज कर दिया है। यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक स्थायी समाधान की तलाश में है।
इस बैठक से ठीक एक दिन पहले, कुशनर ने मिस्र के अल-अलमीन का दौरा किया, जहाँ उन्होंने कतर, तुर्की और मिस्र के मध्यस्थों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। उनके साथ 'बोर्ड ऑफ पीस' के महानिदेशक निकोले म्लादेनोव और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, कुशनर ने हमास के राजनीतिक नेतृत्व के साथ भी एक दुर्लभ बैठक की, ताकि रोडमैप की प्रतिबद्धताओं को ठोस और सत्यापन योग्य कदमों में बदला जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मिशन केवल एक राजनयिक मुलाकात नहीं है, बल्कि ट्रंप प्रशासन द्वारा मध्य पूर्व में अपनी विरासत को सुरक्षित करने का प्रयास है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह दशकों पुराने संघर्ष में एक युगांतरकारी मोड़ साबित हो सकता है, लेकिन नेतन्याहू की चुनावी महत्वाकांक्षाएं इसमें सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
"गाजा में शांति की कुंजी केवल समझौतों में नहीं, बल्कि उन समझौतों के जमीनी क्रियान्वयन और आपसी विश्वास की बहाली में निहित है।"
जुलाई के अंत में, राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि हमास के निरस्त्रीकरण के लिए एक समझौता हो गया है। इस सफलता का श्रेय 'बोर्ड ऑफ पीस' को दिया गया, जिसकी स्थापना फरवरी 2026 में की गई थी। इस बोर्ड में इजरायल और कई अरब देशों सहित लगभग 40 देश शामिल हैं, हालांकि इसमें फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति एक विवाद का विषय बनी हुई है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू, जो अक्टूबर में पुन: चुनाव लड़ रहे हैं, ने इस योजना का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। उनका मुख्य विरोध उस प्रावधान को लेकर है जिसमें हमास धीरे-धीरे हथियार डालेगा और गाजा का शासन एक अंतरराष्ट्रीय बल को सौंप देगा, जिसके बदले में इजरायली सेना गाजा से वापस हटेगी। दूसरी ओर, हमास ने संकेत दिया है कि वह योजना स्वीकार कर सकता है, लेकिन शर्त यह है कि इजरायल पहले अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे और हमलों को रोके।
| पक्ष | योजना पर रुख | मुख्य शर्त/चिंता |
|---|---|---|
| इजरायल (नेतन्याहू) | अस्वीकार | अंतरराष्ट्रीय बल को शासन सौंपना |
| हमास | सशर्त स्वीकृति | इजरायली सेना की पूर्ण वापसी |
| बोर्ड ऑफ पीस | प्रोत्साहन | हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण |
ऐतिहासिक रूप से, गाजा में 2025 के अंत में एक युद्धविराम हुआ था, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया गया। लेकिन दुखद रूप से, इस युद्धविराम के बाद भी हिंसा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,260 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: जारेड कुशनर की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: मुख्य उद्देश्य नेतन्याहू को ट्रंप की 15-सूत्रीय गाजा शांति योजना के लिए राजी करना और हमास के साथ बातचीत को अंतिम रूप देना है।
प्रश्न 2: इजरायल इस योजना का विरोध क्यों कर रहा है?
उत्तर: इजरायल इस बात से असहमत है कि हमास के निरस्त्रीकरण के बाद गाजा का शासन किसी अंतरराष्ट्रीय बल को सौंपा जाए।