इजरायल द्वारा अमेरिका समर्थित 15-सूत्रीय गाजा युद्धविराम योजना को खारिज करने के बाद जेरेड कुशनर ने बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। इस गतिरोध ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है और पुनर्निर्माण कार्यों को रोक दिया है।

  • जेरेड कुशनर ने यरूशलेम में पीएम नेतन्याहू के साथ बंद कमरे में बैठक की।
  • इजरायल ने अमेरिका समर्थित 15-सूत्रीय रोडमैप को खारिज कर दिया है।
  • हमास ने रोडमैप पर सहमति जताई है, लेकिन इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण की मांग कर रहा है।
  • सऊदी अरब और यूएई सहित कई देशों ने इजरायल की इस जिद की निंदा की है।

यरूशलेम में सोमवार को अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब इजरायल ने गाजा में शांति बहाली के लिए अमेरिका द्वारा समर्थित एक व्यापक 15-सूत्रीय रोडमैप को सिरे से खारिज कर दिया है। इस योजना का उद्देश्य गाजा में युद्धविराम को आगे बढ़ाना और क्षेत्र के पुनर्निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना था।

इस उच्च-स्तरीय बैठक में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और बोर्ड ऑफ पीस के निदेशक निकोलाई म्लादेनोव भी शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक पूरी तरह गोपनीय रखी गई थी। वर्तमान में इजरायली सेना गाजा के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखती है, और नेतन्याहू ने इस नियंत्रण को और बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जिससे राजनयिक प्रयासों में बड़ी बाधा उत्पन्न हो गई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह गतिरोध केवल सैन्य रणनीति का मामला नहीं है, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संकट है। यदि यह रोडमैप विफल होता है, तो गाजा में 20 लाख से अधिक फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय संकट और गहरा जाएगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव अब इजरायल पर केंद्रित है, क्योंकि हमास ने पहले ही इस योजना पर अपनी सहमति दे दी है, जिससे इजरायल अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर 'शांति विरोधी' नजर आ रहा है।

"गाजा में शांति अब केवल सैन्य जीत पर नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय राजनीतिक ढांचे के निर्माण पर निर्भर करती है, जिसे इजरायल वर्तमान में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।"

इस बैठक से ठीक पहले, कुशनर ने मिस्र में हमास प्रमुख खलील अल-हय्या के साथ दो घंटे से अधिक चर्चा की थी। हमास ने मांग की है कि इजरायल अपनी सेना को तथाकथित 'येलो लाइन' (Yellow Line) के पीछे हटाए। हालांकि, इस लाइन की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है और इजरायली सेना पहले ही इसे पार कर चुकी है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य नियंत्रण को 70 प्रतिशत तक ले जाना है।

क्षेत्रीय स्तर पर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने एक संयुक्त बयान जारी कर इजरायल की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि शांति प्रयासों में बाधा डालने की पूरी जिम्मेदारी अब इजरायल की है। जॉर्डन, पाकिस्तान और इंडोनेशिया ने भी अमेरिका और बोर्ड ऑफ पीस से कड़े कदम उठाने का आग्रह किया है।

पक्ष रोडमैप पर रुख मुख्य मांग
हमास सहमत इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और फिलिस्तीनी राज्य का निर्माण।
इजरायल अस्वीकृत किसी भी वापसी से पहले हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण।

घरेलू मोर्चे पर, नेतन्याहू 27 अक्टूबर के चुनावों की ओर बढ़ रहे हैं। उनके गठबंधन में कई कट्टरपंथी मंत्री हैं जो गाजा के प्रति सख्त रुख अपनाने का दबाव बना रहे हैं। 7 अक्टूबर के हमलों की बरसी नजदीक आने के साथ, राजनीतिक और भावनात्मक तनाव चरम पर है, जिससे किसी भी समझौते पर पहुंचना और कठिन हो गया है।

क्या आप जानते हैं?: 'बोर्ड ऑफ पीस' एक विशेष अमेरिकी पहल है जिसे मध्य पूर्व में संघर्ष समाधान के लिए एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में कार्य करने के लिए बनाया गया है।

Frequently Asked Questions

1. अमेरिकी रोडमैप के मुख्य बिंदु क्या हैं?
इसमें हमास का निरस्त्रीकरण, एक तकनीकी समिति द्वारा गाजा का प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय बलों की तैनाती शामिल है।

2. इजरायल इस योजना को क्यों नहीं मान रहा है?
इजरायल का तर्क है कि जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं डालता, तब तक सेना की वापसी संभव नहीं है।