विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने फिलिस्तीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और गाजा में बिगड़ते मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने शांति के लिए बातचीत और कूटनीति के माध्यम से दो-राज्य समाधान का समर्थन जारी रखने की बात कही है।
- भारत ने फिलिस्तीन के लिए 'दो-राज्य समाधान' (Two-State Solution) का पुरजोर समर्थन किया।
- MEA सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने गाजा में गंभीर मानवीय स्थिति पर चिंता जताई।
- द्विपक्षीय संबंधों में विकास सहयोग, स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- भारत ने संघर्ष के समाधान के लिए निरंतर संवाद और कूटनीति पर जोर दिया।
नई दिल्ली/जेरूसलम: भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्पष्ट और सुसंगत विदेश नीति का प्रदर्शन किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने फिलिस्तीन के विदेश मंत्री वर्सन अघबेकियन शाहिन से मुलाकात की और फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत के अटूट समर्थन को दोहराया। इस महत्वपूर्ण राजनयिक दौरे के दौरान, भारत ने स्पष्ट किया कि वह एक 'वार्ता आधारित दो-राज्य समाधान' (Negotiated Two-State Solution) का पक्षधर है, जहाँ इज़राइल और फिलिस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ सह-अस्तित्व में रह सकें।
श्रीप्रिया रंगनाथन, जो वर्तमान में मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान के आधिकारिक दौरे पर हैं, ने गाजा में जारी गंभीर मानवीय संकट पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि गाजा की स्थिति को केवल निरंतर मानवीय सहायता और निरंतर संवाद के माध्यम से ही सुधारा जा सकता है। भारत का रुख इस बात पर केंद्रित है कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए कूटनीतिक रास्ते ही एकमात्र विकल्प हैं।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह रुख वैश्विक भू-राजनीति में उसकी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को दर्शाता है। एक तरफ भारत के इज़राइल के साथ मजबूत रक्षा और तकनीकी संबंध हैं, तो दूसरी तरफ वह फिलिस्तीन के प्रति अपने ऐतिहासिक और मानवीय दायित्वों को भी निभा रहा है। यह संतुलन भारत को वैश्विक दक्षिण (Global South) के एक विश्वसनीय नेता के रूप में स्थापित करता है।
शांति के लिए केवल युद्धविराम पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक समाधान की आवश्यकता है जो दोनों पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
मुलाकात के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-फिलिस्तीन द्विपक्षीय संबंधों के पूर्ण स्पेक्ट्रम की समीक्षा की। इसमें भारत द्वारा फिलिस्तीन में चलाए जा रहे विकास सहयोग कार्यक्रम, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और क्षमता निर्माण (Capacity Building) पहल शामिल हैं। फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने जनवरी में भारत की अपनी सफल यात्रा का उल्लेख करते हुए भारत की सहायता के प्रति आभार व्यक्त किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत का फिलिस्तीन के प्रति दृष्टिकोण दशकों पुराना है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भी भारत ने अक्सर ऐसे प्रस्तावों का समर्थन किया है जो दो-राज्य समाधान की वकालत करते हैं। भारत की सहायता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से फिलिस्तीनी संस्थानों को मजबूत करने में भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 'दो-राज्य समाधान' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि इज़राइल और फिलिस्तीन दो स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के रूप में शांति से एक-दूसरे के बगल में रहेंगे।
2. गाजा में भारत की क्या भूमिका है?
भारत मानवीय सहायता प्रदान करने और संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक संवाद का समर्थन करने पर केंद्रित है।