सितंबर में होने वाले ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, संस्कृति और निवेश को बढ़ावा देना है। दक्षिण अफ्रीका के कौंसल जनरल ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के मजबूत होते संबंधों पर जोर दिया है।

  • ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम 5-6 सितंबर, 2026 को आयोजित किया जाएगा।
  • इस साल भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।
  • फोरम का मुख्य विषय 'सभ्यतागत विरासत' (Civilisational Legacy) होगा।
  • दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर।

बेंगलुरु: आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बीच, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को बुलंद करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका के कौंसल जनरल, गिडियन लाबाने ने घोषणा की है कि सितंबर में दूसरे संस्करण के ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष फोरम का विषय 'सभ्यतागत विरासत' (Civilisational Legacy) रखा गया है।

एक मीडिया राउंडटेबल के दौरान, श्री लाबाने ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रिश्ता परिचय का नहीं, बल्कि और अधिक गति देने का है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दक्षिण अफ्रीका ने हाल ही में G20 की अध्यक्षता की है और इस वर्ष भारत ब्रिक्स का नेतृत्व कर रहा है। इसका अर्थ है कि पिछले दो वर्षों से 'ग्लोबल साउथ' के एजेंडे की कमान इन दोनों देशों के पास रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फोरम केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं है, बल्कि यह आर्थिक शक्ति के हस्तांतरण का एक माध्यम है। जब वैश्विक दक्षिण के देश मिलकर निवेश, आपूर्ति श्रृंखला (supply chains) और तकनीकी मानकों पर बात करते हैं, तो वे पश्चिमी प्रभुत्व वाले आर्थिक ढांचे को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

हमारा सवाल अब यह नहीं है कि क्या हमारी आवाज सुनी जा रही है, बल्कि यह है कि क्या हमारी आवाज निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदल रही है।

श्री लाबाने ने तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के पास वे महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) हैं जिनके बिना आधुनिक तकनीक काम नहीं कर सकती, जबकि भारत (विशेषकर कर्नाटक) के पास उन तकनीकों को विकसित करने की क्षमता है। यह तालमेल दोनों देशों के लिए एक 'विन-विन' स्थिति पैदा करता है।

फोरम के दौरान दक्षिण अफ्रीका से लगभग 20 प्रमुख बिजनेस लीडर्स के शामिल होने की उम्मीद है। यह मंच राजनयिकों, निवेशकों, उद्यमियों और कलाकारों को एक साथ लाने का काम करेगा ताकि ब्रिक्स देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध स्थापित किए जा सकें।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध दशकों पुराने हैं, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और उपनिवेशवाद विरोधी संघर्ष पर आधारित हैं। वर्तमान में, दक्षिण अफ्रीका की लगभग 3% आबादी (लगभग 1.7 मिलियन लोग) भारतीय मूल की है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सामाजिक सेतु का काम करती है।

Did You Know?: दक्षिण अफ्रीका के पास दुनिया के सबसे बड़े प्लैटिनम और क्रोमियम भंडार हैं, जो भविष्य की ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए अनिवार्य हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, निवेश, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है।

प्रश्न 2: यह फोरम कब आयोजित किया जाएगा?
उत्तर: यह फोरम 5 और 6 सितंबर, 2026 को आयोजित किया जाएगा।