ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर घालीबाफ ने स्पष्ट किया है कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और जीत के लिए प्रतिरोध ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने चेतावनी दी है कि युद्ध की तैयारी के बिना की गई कोई भी वार्ता निष्फल होगी।
- घालीबाफ ने कहा कि प्रतिरोध ही ईरान की जीत का एकमात्र मार्ग है।
- अमेरिकी दबाव और नई नियुक्तियों को उन्होंने 'अपनी क्षमता से बाहर' बताया।
- चेतावनी दी गई कि युद्ध की तैयारी के बिना बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर घालीबाफ ने वैश्विक राजनीति और विशेष रूप से अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच एक अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। घालीबाफ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान के लिए जीत का एकमात्र रास्ता 'प्रतिरोध' (Resistance) है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि ईरान युद्ध की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है, तो किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत या वार्ता का कोई मूल्य नहीं होगा।
हालिया घटनाक्रमों में, घालीबाफ ने अमेरिकी प्रशासन की नई टीम, विशेष रूप से स्कॉट बेसेंट और पीट हेगसेथ के संदर्भ में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने इन नियुक्तियों को 'अपनी लीग से बहुत बाहर' बताते हुए संकेत दिया कि अमेरिका की नई रणनीतियां ईरान को डराने में विफल रहेंगी। ईरान का मानना है कि अमेरिका केवल concessions (रियायतें) प्राप्त करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जो कि मूल फ्रेमवर्क समझौते का हिस्सा भी नहीं थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि घालीबाफ का यह बयान केवल घरेलू राजनीति के लिए नहीं है, बल्कि यह मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन के बदलते समीकरणों को दर्शाता है। ईरान अब रक्षात्मक मुद्रा के बजाय एक सक्रिय प्रतिरोध की रणनीति अपना रहा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव को और बढ़ा सकता है।
अगर हम युद्ध के लिए तैयार नहीं हैं, तो बातचीत केवल समय की बर्बादी है।
ईरान ने अमेरिका की नई टीम को 'जोकर' (Clowns) तक कह डाला है, जो वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते राजनयिक अलगाव को दर्शाता है। यह विवाद केवल आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई बन चुका है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का इतिहास दशकों पुराना है, जो 1979 की इस्लामी क्रांति से शुरू हुआ था। पिछले कुछ वर्षों में, परमाणु समझौते (JCPOA) के टूटने और ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने इस शत्रुता को और गहरा कर दिया है।
Frequently Asked Questions
1. घालीबाफ का मुख्य संदेश क्या है?
उनका मुख्य संदेश यह है कि ईरान बिना सैन्य तैयारी के किसी भी बातचीत में नहीं जाएगा और प्रतिरोध ही उनकी शक्ति है।
2. अमेरिका पर ईरान ने क्या आरोप लगाए हैं?
ईरान का आरोप है कि अमेरिका उन रियायतों को छीनने की कोशिश कर रहा है जो कभी समझौते का हिस्सा ही नहीं थीं।