अमेरिका ने सीरिया-तुर्की सीमा के पास एक सीरियाई सैन्य एयरबेस पर इजरायली हवाई हमलों की कड़ी आलोचना की है। वाशिंगटन ने इन हमलों को एक "गैर-जरूरी तनाव" करार दिया है, जबकि इजरायल का दावा है कि सीरिया सुरक्षा समझौतों का उल्लंघन कर रहा था।

  • अमेरिका ने सीरिया के अबू दुहूर एयरबेस पर इजरायली हमलों की सीधे तौर पर आलोचना की है।
  • इजरायल का दावा है कि सीरिया ने तुर्की बलों को तैनात होने की अनुमति देकर सुरक्षा समझौतों का उल्लंघन किया।
  • सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने किसी भी तरह के छद्म (proxy) बलों को शरण देने से इनकार किया है।

अमेरिका ने इजरायल को एक दुर्लभ और कड़ा कूटनीतिक संदेश देते हुए सीरियाई सैन्य एयरबेस पर किए गए हवाई हमलों की तीखी आलोचना की है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस सैन्य कार्रवाई को "गैर-जरूरी तनाव बढ़ाने वाला" बताया है, जिससे मध्य पूर्व की नाजुक स्थिरता को गंभीर खतरा हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीरिया में दशकों पुराने असद शासन के पतन के बाद एक नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने की कोशिशें की जा रही हैं।

सीरियाई सरकारी टेलीविजन के अनुसार, मंगलवार को अबू दुहूर हवाई अड्डे के रनवे और भंडारण सुविधा को निशाना बनाकर आठ हवाई हमले किए गए। हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इसने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। सीरिया और तुर्की दोनों ने इस हमले के लिए इजरायली सेना को जिम्मेदार ठहराया है।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान जारी कर इस हमले का बचाव किया। इजरायल का आरोप है कि सीरिया ने अलेप्पो के पास स्थित इस एयरबेस पर तुर्की सैनिकों को तैनात होने की अनुमति देकर सुरक्षा यथास्थिति (status quo) को तोड़ने की कोशिश की थी। इजरायल का मानना है कि उसकी सीमाओं के पास किसी भी विदेशी सेना का अनियंत्रित जमावड़ा उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।

सीरिया के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए इसे "अकारण आक्रामकता का कृत्य" करार दिया। वहीं, तुर्की ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि उसके सैनिक वहां तैनात थे या नहीं, लेकिन उसने इजरायल के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। तुर्की के संचार निदेशालय ने कहा कि इजरायल के आरोप उसके अवैध हवाई हमलों को सही ठहराने की एक कोशिश मात्र हैं।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना असद-युग के बाद के सीरिया में अमेरिका, तुर्की और इजरायल के बीच बढ़ते रणनीतिक मतभेदों को दर्शाती है। जहां इजरायल नई सीरियाई सरकार को संदेह की दृष्टि से देख रहा है, वहीं अमेरिका दमिश्क के नए नेतृत्व को अपने साथ जोड़ने और उसे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। यदि यह टकराव बढ़ता है, तो इससे अमेरिका और इजरायल के पारंपरिक संबंधों में भी खटास आ सकती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के रूप में, अबू दुहूर एयरबेस 2013 से एक सक्रिय सैन्य हवाई क्षेत्र के रूप में बंद था। दिसंबर 2024 में असद विरोधी ताकतों ने इस पर नियंत्रण कर लिया था। असद सरकार के पतन के बाद से सीरिया नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व में अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस पुनर्गठन में तुर्की और अमेरिका दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

"वाशिंगटन और यरुशलम के बीच सीरियाई हवाई क्षेत्र को लेकर सार्वजनिक मतभेद यह दर्शाते हैं कि असद के बाद के सीरिया को संभालने की दोनों देशों की रणनीतियों में बड़ा अंतर आ चुका है।"
देशआधिकारिक रुख / कार्रवाईमुख्य रणनीतिक चिंता
अमेरिकाहमलों की 'गैर-जरूरी तनाव' के रूप में निंदा कीक्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और कूटनीतिक बदलाव का समर्थन करना
इजरायलअबू दुहूर एयरबेस पर हवाई हमले किएतुर्की के सैन्य जमावड़े और अन्य बाहरी ताकतों के प्रभाव को रोकना
सीरियाहमलों को "अकारण आक्रामकता" बताकर खारिज कियासैन्य बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण और संप्रभुता की रक्षा
तुर्कीखतरे की बात कहने वाले इजरायली दावों को खारिज कियाअपनी दक्षिणी सीमा को सुरक्षित करना और नए सीरियाई प्रशासन का समर्थन
क्या आप जानते हैं?: सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने 2025 के अंत में व्हाइट हाउस का दौरा कर इतिहास रच दिया था, जो पिछले लगभग छह दशकों में किसी सीरियाई नेता की पहली अमेरिकी यात्रा थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इजरायल ने अबू दुहूर एयरबेस पर हमला क्यों किया?
उत्तर: इजरायल का दावा है कि सीरिया ने तुर्की सैनिकों को इस एयरबेस पर तैनात होने की अनुमति देकर सुरक्षा समझौतों का उल्लंघन किया था, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बिगड़ सकता था।

प्रश्न 2: इस मुद्दे पर अमेरिका का क्या रुख है?
उत्तर: अमेरिका ने इन हमलों की निंदा की है और इसे एक अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई बताया है। अमेरिका का मानना है कि नए सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा क्षेत्र में शांति और कूटनीतिक बातचीत के पक्षधर हैं।