तेजी से बढ़ते एल नीनो के कारण दुनिया भर में सूखे, बाढ़ और भीषण गर्मी का खतरा मंडरा रहा है। श्रीलंका में पानी की भारी किल्लत है, जबकि इंडोनेशिया में जंगलों की आग ने तबाही मचा रखी है।
- एल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर मौसम के चरम रूप बदलने की आशंका है।
- श्रीलंका ने सूखे से निपटने के लिए 4.8 बिलियन रुपये आवंटित किए हैं।
- इंडोनेशिया में 2 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि जंगलों की आग की चपेट में है।
- पेरू और होंडुरास जैसे देश भी गंभीर जलवायु संकट का सामना कर रहे हैं।
दुनिया भर की सरकारें एक ऐतिहासिक जलवायु संकट की तैयारी कर रही हैं। तेजी से मजबूत होता एल नीनो (El Nino) इस साल के अंत तक दुनिया भर में सूखे, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और जंगलों की आग के जोखिम को काफी बढ़ा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह घटना रिकॉर्ड में सबसे खराब घटनाओं में से एक हो सकती है।
श्रीलंका में जल संकट का गहराता संकट
श्रीलंका में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, देश के सात जिलों में लगभग 72,000 लोगों को पानी पहुँचाने की व्यवस्था की गई है। देश के सैकड़ों छोटे टैंकों में जल स्तर गिरकर मात्र 10 प्रतिशत रह गया है। सरकार ने पेयजल और स्वच्छता की जरूरतों को पूरा करने के लिए 4.8 बिलियन रुपये (लगभग 14 मिलियन डॉलर) का बजट आवंटित किया है। प्रभावित परिवारों को हर दो-तीन दिनों में केवल 75 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
पर्यावरण मंत्री दम्मिका पटाबंदी ने बताया कि एल नीनो के शिखर पर पहुँचने का अनुमान पहले नवंबर का था, लेकिन अब माना जा रहा है कि यह बहुत जल्द अपने चरम पर पहुँच जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यकतानुसार अपनी प्रतिक्रियात्मक उपायों में संशोधन करेगी।
इंडोनेशिया में जंगलों की आग और वायु प्रदूषण
इंडोनेशिया में स्थिति और भी भयावह है। इस वर्ष की शुरुआत से अब तक जंगलों की आग ने 2,00,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को जलाकर राख कर दिया है, जो जकार्ता शहर के आकार से लगभग तीन गुना बड़ा है। केवल जुलाई महीने में ही 95,000 हेक्टेयर भूमि जल गई। इस आग से पैदा हुआ घना धुआं (Smog) बोर्नियो जैसे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को बेहद खराब कर रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों को मास्क पहनने और घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एल नीनो केवल एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है। जब कृषि योग्य भूमि सूख जाती है और जल स्रोत समाप्त हो जाते हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और पलायन (migration) पर पड़ता है।
एल नीनो का यह वर्ष अत्यधिक अस्थिरता पैदा कर सकता है, जिससे विकासशील देशों के बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव पड़ेगा।
इसके अतिरिक्त, मध्य अमेरिका के होंडुरास में 80 प्रतिशत देश को सूखे की चेतावनी दी गई है, जहाँ फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और पशुधन की मृत्यु हो रही है। वहीं, पेरू की मदद के लिए अमेरिका ने अगले वर्ष एक सैन्य अस्पताल भेजने का निर्णय लिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण होता है। यह पैटर्न दुनिया भर में बारिश और तापमान के चक्र को बदल देता है, जिससे कहीं अत्यधिक बारिश तो कहीं भीषण सूखा पड़ता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एल नीनो का मुख्य प्रभाव क्या है?
उत्तर: यह वैश्विक मौसम पैटर्न को बदल देता है, जिससे सूखे, बाढ़ और अत्यधिक गर्मी जैसी चरम स्थितियां पैदा होती हैं।
प्रश्न 2: श्रीलंका सरकार सूखे से कैसे लड़ रही है?
उत्तर: सरकार ने पानी के वितरण के लिए विशेष बजट आवंटित किया है और प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुँचाया जा रहा है।