भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आतंकवादियों को 'वैध' बनाने के लिए सदस्यता का उपयोग करने की कड़ी निंदा की है। भारत ने राजनीतिक हितों के लिए प्रतिबंधों को हटाने के प्रयासों को 'छिपा हुआ वीटो' करार दिया है।
- भारत ने UNSC सदस्यों से आतंकवादियों को राजनीतिक लाभ के लिए बचाने की मांग रोकने को कहा है।
- नई दिल्ली ने प्रतिबंध समितियों में पारदर्शिता की कमी और 'छिपे हुए वीटो' पर चिंता जताई है।
- भारत ने सुरक्षा परिषद के सहायक निकायों के अध्यक्षों की नियुक्ति में हो रहे विलंब की आलोचना की है।
- UNSC सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया ताकि यह 1945 के पुराने ढांचे से बाहर निकल सके।
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक महत्वपूर्ण बहस के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि परिषद की सदस्यता का उपयोग आतंकवादियों को 'वैध' बनाने के लिए एक उपकरण के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। भारत के स्थायी मिशन की चार्ज डी'आफ़ेयर, अंबassador योजना पटेल ने स्पष्ट किया कि आतंकवादियों को प्रतिबंधों से बाहर करने या केवल 'राजनीतिक विचारों' के आधार पर संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करने के लिए सुरक्षा परिषद का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
अंबassador पटेल ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर आयोजित एक खुली बहस को संबोधित करते हुए कहा कि शक्तिशाली 15-राष्ट्रों वाले इस निकाय को संकीर्ण राजनीतिक हितों को पूरा करने का मंच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से आतंकवादियों की सूची में नाम जोड़ने (Listing) और हटाने (De-listing) की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की कमी की ओर इशारा किया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह बयान वैश्विक आतंकवाद विरोधी लड़ाई में एक रणनीतिक मोड़ है। जब सुरक्षा परिषद के सदस्य देश अपने राजनीतिक हितों के कारण आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने में बाधा डालते हैं, तो इससे न केवल परिषद की विश्वसनीयता कम होती है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा होता है। भारत ने पहले भी इस तरह की प्रथाओं को "डिस्गाइज़्ड वीटो" (छिपा हुआ वीटो) कहा है, जहाँ कुछ देश तकनीकी आधार पर प्रस्तावों को रोक देते हैं।
सुरक्षा परिषद की सदस्यता जिम्मेदारी के साथ आती है, इसे राजनीतिक लाभ के लिए आतंकवादियों को बचाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।
भारत ने विशेष रूप से 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के कामकाज पर चिंता व्यक्त की है। नई दिल्ली का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों को नामित करने वाले साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों को बिना किसी पर्याप्त स्पष्टीकरण के नहीं रोका जाना चाहिए। भारत को अतीत में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने के प्रयासों में चीन जैसे स्थायी सदस्यों द्वारा बाधाओं का सामना करना पड़ा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का वर्तमान स्वरूप 1945 के द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की भू-राजनीतिक व्यवस्था पर आधारित है। भारत ने तर्क दिया है कि 1945 की दुनिया अब पूरी तरह बदल चुकी है और संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता में चार गुना वृद्धि हुई है। वर्तमान ढांचे में सुधार की आवश्यकता है ताकि यह आधुनिक चुनौतियों का सामना कर सके।
इसके अतिरिक्त, भारत ने सुरक्षा परिषद के सहायक निकायों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति में हो रहे अत्यधिक विलंब पर भी सवाल उठाए हैं। 2026 के आठ महीने बीत जाने के बाद भी, इन समितियों के अध्यक्षों का चयन नहीं हो पाया है, जिससे परिषद की प्रभावशीलता बाधित हो रही है।
Frequently Asked Questions
1. भारत ने 'डिस्गाइज़्ड वीटो' शब्द का उपयोग क्यों किया?
भारत ने इसका उपयोग तब किया जब कुछ देश बिना किसी ठोस कारण के आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों को 'तकनीकी होल्ड' पर रख देते हैं, जो एक प्रकार का गुप्त वीटो है।
2. UNSC में सुधार की भारत की मुख्य मांग क्या है?
भारत का मानना है कि सुरक्षा परिषद को 1945 के पुराने ढांचे से निकलकर वर्तमान वैश्विक वास्तविकता और सदस्यता के विस्तार के अनुरूप खुद को बदलना चाहिए।