पूर्व IRGC कमांडर मोहमद रेजाई को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया गया है। युद्ध के बीच यह नियुक्ति सर्वोच्च नेता के प्रति उनकी वफादारी और सुरक्षा ढांचे में बदलाव का संकेत देती है।

  • मोहमद रेजाई को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) का सचिव नियुक्त किया गया है।
  • वह सर्वोच्च नेता मोतबा खामेनेई के करीबी और भरोसेमंद सलाहकार हैं।
  • यह नियुक्ति अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे युद्ध के बीच हुई है।
  • रेजाई 16 वर्षों तक IRGC के कमांडर-इन-चीफ रहे हैं।

ईरान की बदलती राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों के बीच, मोहमद रेजाई का उदय एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। जिन्हें कभी 'शाश्वत उम्मीदवार' के रूप में देखा जाता था, वे अब युद्ध से जूझ रहे ईरान के सबसे शक्तिशाली निर्णय लेने वालों में से एक बन गए हैं। 71 वर्षीय रेजाई की नियुक्ति ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब अपने सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह से कट्टरपंथी और वफादार हाथों में सौंप रहा है।

फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध ने देश के नेतृत्व को बदल कर रख दिया है। अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के बाद, मोतबा खामेनेई ने सत्ता संभाली। इस संकट के दौरान, रेजाई को नए सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार के रूप में चुना गया था, और अब उन्हें सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में पदोन्नत किया गया है, जो युद्ध के समय रणनीतिक निर्णयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निकाय है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि रेजाई की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह ईरान के 'प्रिंसिपलिस्ट' (कट्टरपंथी) गुट की जीत है। युद्ध की स्थिति में, मोतबा खामेनेई ने सुधारवादियों के बजाय उन लोगों को चुना है जो विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। यह कदम ईरान की विदेश नीति और सैन्य प्रतिक्रियाओं को और अधिक आक्रामक बना सकता है।

रेजाई की नियुक्ति यह दर्शाती है कि ईरान अब कूटनीति के बजाय सैन्य दृढ़ता और वैचारिक शुद्धता को प्राथमिकता दे रहा है।

रेजाई का इतिहास ईरान की क्रांति से गहराई से जुड़ा है। 1973 में शाह के शासन के दौरान गिरफ्तारी से लेकर, 1979 की क्रांति के बाद IRGC के संस्थापक चार्टर को लिखने वाले 12 सदस्यीय समिति का हिस्सा बनने तक, उनका जीवन इस्लामी गणराज्य के निर्माण का गवाह रहा है। 1981 में IRGC के कमांडर-इन-चीफ के रूप में उनका 16 साल का कार्यकाल उनकी सैन्य शक्ति का प्रमाण है।

उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि भी उन्हें विशिष्ट बनाती है। अर्थशास्त्र में पीएचडी धारक रेजाई ने इमाम हुसैन विश्वविद्यालय की सह-स्थापना की। हालांकि, उनकी असली पहचान एक कट्टरपंथी राजनीतिज्ञ की है, जिन्होंने हमेशा सुधारवादी एजेंडे का विरोध किया है।

वर्तमान संघर्ष में उनका रुख अत्यंत स्पष्ट है। उन्होंने हाल ही में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण 'दर्जनों परमाणु बमों से अधिक महत्वपूर्ण' है। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अविश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान किसी भी जमीनी आक्रमण के लिए तैयार है।

Did You Know?: मोहमद रेजाई ने 2009, 2013 और 2021 में ईरान के राष्ट्रपति पद के लिए तीन बार चुनाव लड़ा था।

Frequently Asked Questions

1. मोहमद रेजाई की नई भूमिका क्या है?
वह ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किए गए हैं।

2. रेजाई का IRGC के साथ क्या संबंध है?
वह IRGC के पूर्व कमांडर-इन-चीफ रहे हैं और उन्होंने इसके संस्थापक चार्टर को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।