संयुक्त राष्ट्र ने भारत में रह रहे श्रीलंकाई शरणार्थियों की स्वैच्छिक वापसी को सुगम बनाने के लिए श्रीलंका सरकार के नए कदमों की सराहना की है। श्रीलंका ने आव्रजन प्रक्रियाओं को सरल बनाने का निर्णय लिया है ताकि दशकों से विस्थापित लोगों का पुनर्वास किया जा सके।
- श्रीलंका ने भारत से शरणार्थियों की वापसी के लिए आव्रजन प्रक्रियाओं को सरल बनाने का निर्णय लिया है।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस कदम को सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
- वर्तमान में लगभग 90,000 श्रीलंकाई शरणार्थी भारत के तमिलनाडु राज्य में रह रहे हैं।
- UNHCR इन शरणार्थियों की वापसी और पुनर्वास की प्रक्रिया में सहायता करता रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने शनिवार को श्रीलंका सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया है, जिसके तहत भारत में रह रहे श्रीलंकाई शरणार्थियों की स्वैच्छिक वापसी को तेज करने के लिए आव्रजन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा। यह उन शरणार्थियों के लिए एक बड़ी राहत है जो दशकों लंबे गृहयुद्ध के दौरान वैध दस्तावेजों के बिना श्रीलंका छोड़ गए थे।
श्रीलंका सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ही इस पहल के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों के लिए वापसी की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है जो लंबे समय से भारत के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। विशेष रूप से, 1983 में जातीय हिंसा और उसके बाद LTTE के साथ सशस्त्र संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग भारत आए थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
श्रीलंका में जातीय संघर्ष की शुरुआत 1983 में हुई थी, जिसके बाद सरकार और लिट्टे (LTTE) के बीच लगभग तीन दशकों तक युद्ध चला। इस हिंसा के कारण हजारों श्रीलंकाई तमिलों को अपनी जान बचाने के लिए भारत भागना पड़ा। इनमें से अधिकांश लोग भारत के तमिलनाडु राज्य में बस गए। हालांकि 2002 से 2022 के बीच लगभग 18,000 लोग स्वदेश लौट चुके हैं, लेकिन अभी भी लगभग 90,000 शरणार्थी भारत में निवास कर रहे हैं।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम न केवल मानवीय आधार पर महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। शरणार्थियों के पास लंबे समय से आजीविका, कानूनी स्थिति और दस्तावेजों की कमी जैसी गंभीर समस्याएं रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि मार्क-आंद्रे फ्रांचे ने कहा, "मैं शरणार्थियों की स्वैच्छिक वापसी के लिए कैबिनेट के निर्णय का स्वागत करता हूं — यह वर्षों के विस्थापन के बाद सुरक्षित और गरिमामय वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) के माध्यम से, अंतरराष्ट्रीय संगठन इन शरणार्थियों की वापसी और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सहायता प्रदान करता रहेगा। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जो लोग वापस लौट रहे हैं, उन्हें समाज में फिर से घुलने-मिलने में कोई बाधा न आए।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: वर्तमान में कितने श्रीलंकाई शरणार्थी भारत में हैं?
उत्तर: अनुमान के अनुसार, लगभग 90,000 श्रीलंकाई शरणार्थी अभी भी भारत में रह रहे हैं।
प्रश्न 2: संयुक्त राष्ट्र इस प्रक्रिया में क्या भूमिका निभा रहा है?
उत्तर: UNHCR शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में मदद कर रहा है।