एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन की उस विवादास्पद नीति को रद्द कर दिया है जिसके तहत 75 देशों के लिए प्रवासी वीजा जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। अदालत ने इस नीति को 'स्पष्ट रूप से अवैध' करार दिया है।

  • अमेरिकी न्यायाधीश ने 75 देशों के लिए प्रवासी वीजा निलंबन नीति को 'अवैध' घोषित किया।
  • अदालत ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया।
  • इस फैसले से पाकिस्तान, बांग्लादेश और ब्राजील जैसे देशों के आवेदकों को बड़ी राहत मिलेगी।

वाशिंगटन: अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस विवादास्पद नीति को पूरी तरह से रद्द कर दिया, जिसके तहत 75 देशों के नागरिकों के लिए प्रवासी वीजा जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। मैनहट्टन में कार्यरत अमेरिकी जिला न्यायाधीश जीनेट वारगास ने इस नीति को 'स्पष्ट रूप से अवैध' (patently unlawful) बताते हुए कहा कि यह संघीय आव्रजन कानून का उल्लंघन करती है।

न्यायाधीश वारगास के अनुसार, यह नीति विदेश मंत्री मार्को रुबियो के वैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। कानून स्पष्ट रूप से विदेश मंत्री को उन शक्तियों से वंचित करता है जो कौंसुलर अधिकारियों द्वारा प्रवासी वीजा के प्रसंस्करण (processing) से संबंधित हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आवेदक की राष्ट्रीयता के आधार पर वीजा जारी करने पर प्रतिबंध लगाना वैधानिक योजना का सीधा उल्लंघन है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला न केवल आव्रजन अधिकारों के लिए एक बड़ी जीत है, बल्कि यह अमेरिकी विदेश नीति और कार्यकारी शक्तियों के बीच के संतुलन को भी पुनर्परिभाषित करता है। जनवरी में लागू की गई इस नीति ने दक्षिण एशिया के पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित लैटिन अमेरिकी देशों (ब्राजील, कोलंबिया), बाल्कन देशों और अफ्रीका के कई देशों को बुरी तरह प्रभावित किया था।

यह निर्णय स्पष्ट करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कार्यकारी शाखा कानून के ऊपर नहीं जा सकती।

राज्य विभाग ने तर्क दिया था कि इन देशों के आवेदक अमेरिकी सरकारी संसाधनों पर बोझ (public charge) बनने के उच्च जोखिम में हैं। हालांकि, नागरिक अधिकार समूहों, जैसे कि कैथोलिक लीगल इमिग्रेशन नेटवर्क और अफ्रीकन कम्युनिटीज टुगेदर ने इस नीति को नस्लीय प्रोफाइलिंग और प्रक्रियात्मक न्याय के उल्लंघन के रूप में चुनौती दी थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू से ही सख्त आव्रजन नीतियों का समर्थन किया है, जिसका उद्देश्य घरेलू सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि, उनके प्रशासन के पिछले कई फैसलों को अदालतों में चुनौती दी गई है, जिसमें अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि ये नीतियां मानवाधिकारों और संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. इस फैसले का किन देशों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा?
इस फैसले से पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्राजील, कोलंबिया और अल्बानिया जैसे देशों के उन लोगों को राहत मिलेगी जो अमेरिकी प्रवासी वीजा के लिए आवेदन कर रहे थे।

2. न्यायाधीश ने इस नीति को अवैध क्यों माना?
न्यायाधीश ने कहा कि विदेश मंत्री के पास आवेदक की राष्ट्रीयता के आधार पर वीजा रोकने की वैधानिक शक्ति नहीं है, जो संघीय कानून का उल्लंघन है।

Did You Know?: अमेरिकी संघीय कानून कौंसुलर अधिकारियों को वीजा प्रक्रिया के मामले में काफी हद तक स्वायत्तता प्रदान करता है।