तुर्किये के राजदूत अली मुरात एर्सोय ने भारत और तुर्किये के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों में छिपी अपार संभावनाओं पर जोर दिया है। उन्होंने 2025 के कूटनीतिक तनाव के बाद संबंधों को पुनः पटरी पर लाने की कोशिशों का विवरण दिया।
- भारत-तुर्किये संबंधों में पर्यटन, व्यापार और शिक्षा प्रमुख स्तंभ हैं।
- 2025 के कूटनीतिक तनाव के बाद भारतीय पर्यटकों की संख्या में सुधार हो रहा है।
- तुर्किये सरकार भारतीय बाजार की संवेदनशीलता और वीजा शुल्क पर विचार कर रही है।
तुर्किये के भारत में राजदूत अली मुरात एर्सोय ने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर एक अत्यंत सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। एक विशेष साक्षात्कार में, उन्होंने कहा कि भारत और तुर्किये के बीच के संबंधों में 'विशाल और काफी हद तक अनछुआ потенциаल' (potential) मौजूद है, जो हर क्षेत्र में विकास की क्षमता रखता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव देखा गया था। विशेष रूप से 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद कूटनीतिक तनाव के कारण भारतीय यात्रियों और व्यवसायों द्वारा तुर्किये का बहिष्कार किया गया था। हालांकि, एर्सोय ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है और पर्यटक संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह दो देशों के बीच 'पीपल-टू-पीपल' (जनता से जनता तक) संपर्क का सबसे मजबूत माध्यम है। जब कूटनीतिक स्तर पर तनाव होता है, तो पर्यटन अक्सर सबसे लचीला क्षेत्र साबित होता है, जो संबंधों को पूरी तरह टूटने से बचाता है।
भारत और तुर्किये के बीच के संबंधों को भू-राजनीतिक शोर से अलग रखकर एक बहुआयामी भविष्य की ओर ले जाने की आवश्यकता है।
एर्सोय ने उल्लेख किया कि 2024 में 3.3 लाख भारतीय पर्यटक तुर्किये गए थे, लेकिन तनाव के कारण यह संख्या गिरकर 2 लाख से कम रह गई थी। हालांकि, इस वर्ष के पहले आठ महीनों में ही लगभग 1,20,000 भारतीय पर्यटक पहुंच चुके हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।
प्रमुख संबंधों के स्तंभ
राजदूत ने स्पष्ट किया कि संबंध केवल पर्यटन तक सीमित नहीं हैं। इसके प्रमुख स्तंभों में शामिल हैं:
- व्यापार: निर्माण, कपड़ा और बुनियादी ढांचे में तुर्की व्यवसायों की बढ़ती रुचि।
- शिक्षा और संस्कृति: शैक्षणिक साझेदारी और तुर्की सामग्री की भारत में बढ़ती लोकप्रियता।
- रक्षा और सहयोग: कुछ क्षेत्रों में रक्षा के निकट सहयोग।
भारतीय यात्रियों की एक बड़ी चिंता तुर्किये का उच्च वीजा शुल्क है। एर्सोय ने स्वीकार किया कि वे इस मुद्दे पर तुर्की विदेश मंत्रालय के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं ताकि भारतीय बाजार के लिए तुर्किये को अधिक सुलभ बनाया जा सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और तुर्किये के संबंध ऐतिहासिक रूप से जटिल रहे हैं। अक्सर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (विशेषकर पाकिस्तान के साथ तुर्किये के रुख) के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां बढ़ी हैं। हालांकि, आर्थिक हितों और सांस्कृतिक आकर्षण ने हमेशा इन दूरियों को पाटने का काम किया है।
Frequently Asked Questions
1. क्या तुर्किये अपने वीजा शुल्क कम करने वाला है?
राजदूत ने कहा है कि वे इस पर अधिकारियों से बात कर रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय विदेश मंत्रालय का होगा।
2. क्या भारत-तुर्किये व्यापार बढ़ रहा है?
हाँ, विशेष रूप से निर्माण और कपड़ा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापारिक रुचि बढ़ रही है।