विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और बांग्लादेश के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच 'साझा हितों' और 'कॉमन ग्राउंड' खोजने की आवश्यकता पर बल दिया है। शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक अनिश्चितता पैदा कर दी है।
- एस जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के लिए आपसी हितों का सम्मान करना अनिवार्य है।
- शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा किया है।
- जयशंकर ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए 'डी-रिस्किंग' और 'विविधीकरण' को महत्वपूर्ण मंत्र बताया।
- चीन के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति ही अच्छे संबंधों की पूर्व शर्त है।
भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को "साझा हितों" को देखना चाहिए और एक "कॉमन ग्राउंड" या सामान्य आधार पर मिलना चाहिए। जयशंकर के ये विचार ऐसे समय में आए हैं जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इस अनिश्चितता का मुख्य कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण मुद्दा है। ढाका सरकार हसीना को वापस चाहती है, जबकि भारत ने उन्हें शरण दी है। जयशंकर ने 'इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम' में कहा कि किसी भी रिश्ते को सफल होने के लिए वह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत केवल अपने हितों की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि वह पड़ोसियों के हितों का भी सम्मान करने के लिए तैयार है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भारत-बांग्लादेश संबंध एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी देखी गई है। यदि दोनों देश साझा आर्थिक और सुरक्षा हितों पर समझौता नहीं करते हैं, तो क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
पड़ोसियों के साथ संबंधों के लिए आपसी हितों की पहचान और सम्मान करना ही एकमात्र रास्ता है।
जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता का जिक्र करते हुए "डी-रिस्किंग" (de-risking) की रणनीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल लागत कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में सुरक्षा मार्जिन बनाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा, "आज के समय में 'भरोसा करें लेकिन जांचें' के बजाय 'अविश्वास करें और विविधीकृत करें' की नीति अपनानी चाहिए।"
चीन के संबंध में, विदेश मंत्री ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा कि 2020 और 2024 के बीच सीमा विवाद के कारण संबंध खराब रहे, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चीन और भारत दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और एक-दूसरे के लिए बाजार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अपनी ताकत बढ़ानी होगी ताकि वह चीन के साथ आत्मविश्वास से मुकाबला कर सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में भारी उतार-चढ़ाव आया है। भारत ने हसीना को शरण दी, जिसे बांग्लादेश के नए नेतृत्व ने कूटनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा सहयोग पर असर पड़ने की संभावना है।
Frequently Asked Questions
1. शेख हसीना का मुद्दा भारत-बांग्लादेश संबंधों को कैसे प्रभावित कर रहा है?
ढाका द्वारा शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग और भारत द्वारा उन्हें शरण देने के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बना हुआ है।
2. जयशंकर ने 'डी-रिस्किंग' के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए देशों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविधीकृत करना चाहिए ताकि वे किसी एक स्रोत पर निर्भर न रहें।