भारत द्वारा वित्तपोषित मालदीव के सबसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट, ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल कर लिया है। थिलामाले ब्रिज का अंतिम खंड सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है, जो द्वीपों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

  • थिलामाले ब्रिज का अंतिम खंड माले और विलिंगिली को जोड़ने के लिए सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है।
  • यह प्रोजेक्ट भारत द्वारा $100 मिलियन अनुदान और $400 मिलियन की लाइन ऑफ क्रेडिट के माध्यम से वित्तपोषित है।
  • परियोजना का 75% से अधिक कार्य पूरा हो चुका है और यह मालदीव का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है।

मालदीव के बुनियादी ढांचे के विकास में एक ऐतिहासिक क्षण आया है। ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP), जिसे थिलामाले ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है, ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत के सहयोग से चल रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत, राजधानी माले को विलिंगिली द्वीप से जोड़ने वाले अंतिम ब्रिज सेगमेंट को आधिकारिक तौर पर अपनी जगह पर रख दिया गया है।

यह परियोजना केवल एक पुल नहीं है, बल्कि यह मालदीव की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए एक लाइफलाइन है। 6.74 किलोमीटर लंबा यह ब्रिज और कॉजवे लिंक माले को विलिंगिली, गुलहिफाल्हु और थिलाफुशी जैसे महत्वपूर्ण द्वीपों से जोड़ेगा। भारत द्वारा वित्तपोषित इस प्रोजेक्ट ने दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति और 'सागर' (SAGAR - Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन का एक जीवंत उदाहरण है। मालदीव जैसे द्वीप राष्ट्र के लिए, द्वीपों के बीच सुगम आवाजाही न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और रसद (logistics) के लिए भी क्रांतिकारी साबित होगी।

यह लिंक मालदीव और भारत की दोस्ती का प्रतीक है, जो विश्वास और साझा प्रगति पर आधारित है।

इस प्रोजेक्ट का निर्माण भारत की प्रसिद्ध कंपनी अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर (Afcons Infrastructure) द्वारा किया जा रहा है। तकनीकी रूप से, यह पुल दुनिया के सबसे ऊंचे प्रीकास्ट सेगमेंट वाले पुलों में से एक है, जिसके सुपरस्ट्रक्चर की ऊंचाई 8.177 मीटर तक पहुँचती है। यह इंजीनियरिंग की दृष्टि से भी एक वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।

मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व को श्रेय दिया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना मालदीव के विकास के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Did You Know?: थिलामाले ब्रिज के प्रीकास्ट सेगमेंट दुनिया के सबसे ऊंचे सेगमेंट में से एक हैं, जो इसकी इंजीनियरिंग मजबूती को दर्शाते हैं।

Frequently Asked Questions

1. ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) क्या है?
यह मालदीव का सबसे बड़ा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है जिसे भारत द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य माले और आसपास के द्वीपों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाना है।

2. इस प्रोजेक्ट में भारत का कितना योगदान है?
भारत इस परियोजना के लिए $100 मिलियन का अनुदान और $400 मिलियन की लाइन ऑफ क्रेडिट प्रदान कर रहा है।