ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के संकल्प को दोहराया है। उन्होंने कहा कि शांति के लिए सैन्य शक्ति का होना अनिवार्य है।
- राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा कि ताइवान का एक इंच भी क्षेत्र बलिदान नहीं किया जाएगा।
- किनमेन द्वीप पर 1958 के युद्ध की 68वीं वर्षगांठ पर यह बयान दिया गया।
- ताइवान ने अगले वर्ष के लिए अपने रक्षा बजट को 1 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर से अधिक करने की योजना बनाई है।
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने रविवार को चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच एक कड़ा रुख अपनाया है। चीन के साथ हुए ऐतिहासिक युद्ध की वर्षगांठ पर एक संवेदनशील सीमावर्ती द्वीप का दौरा करते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि ताइवान की संप्रभुता और शांति को बनाए रखने के लिए शक्ति का प्रदर्शन आवश्यक है।
राष्ट्रपति लाई ने किनमेन (Kinmen) द्वीप पर 1958 के संघर्ष की 68वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्मारक समारोह में भाग लिया। भारी बारिश के बीच, उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कहा, "शांति केवल शक्ति के माध्यम से ही सुरक्षित की जा सकती है, और हम अपना एक इंच क्षेत्र भी बलिदान नहीं कर सकते।"
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 1958 का संघर्ष, जिसे दूसरे ताइवान जलडमरूमध्य संकट की शुरुआत के रूप में जाना जाता है, ताइवान और चीनी बलों के बीच बड़े पैमाने पर हुआ अंतिम प्रमुख युद्ध था। उस समय, चीनी सेना ने किनमेन और मात्सु द्वीपों पर भारी बमबारी की थी। आज भी, किनमेन चीन के नियंत्रित क्षेत्र से 2 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है, जो इसे भू-राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाता है।
बोजोकमीडिया विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, राष्ट्रपति लाई का यह बयान केवल एक भावुक भाषण नहीं है, बल्कि बीजिंग की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ एक रणनीतिक संकेत है। ताइवान का रक्षा बजट अगले वर्ष पहली बार 1 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर ($30 बिलियन) को पार करने की उम्मीद है, जो दर्शाता है कि ताइवान अब केवल कूटनीति पर नहीं, बल्कि सैन्य मजबूती पर भी भरोसा कर रहा है।
शांति कभी भी आसमान से नहीं गिरती; इसे रक्षा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से अर्जित करना पड़ता है।
चीन लगातार ताइवान को एक 'अलगाववादी' मानता है और इसे अपना हिस्सा समझता है। हालांकि, राष्ट्रपति लाई ने स्पष्ट किया है कि ताइवान का भविष्य केवल ताइवानी लोगों द्वारा ही तय किया जा सकता है। हाल के वर्षों में, चीन की ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियां और तटीय गश्ती ताइपे की चिंताओं को बढ़ा रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. 1958 का संघर्ष क्या था?
यह ताइवान जलडमरूमध्य का दूसरा संकट था, जिसमें चीनी सेना ने किनमेन और मात्सु द्वीपों पर भारी गोलाबारी की थी।
2. ताइवान का रक्षा बजट क्या है?
ताइवान अगले वर्ष के लिए अपने रक्षा खर्च को 1 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर से अधिक करने की योजना बना रहा है।