राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित द्विवाल ने बीजिंग में दो‑दिवसीय यात्रा के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा प्रश्न पर चर्चा की। यह मुलाकात नवम्बर के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शांति और स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • अजित द्विवाल ने वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर सीमा मुद्दे पर वार्ता की।
  • वार्ता का उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत‑चीन संबंधों में स्थिरता लाना है।
  • अर्जुनाचल प्रदेश के नामकरण विवाद और एलएसी में शांति को दोनों पक्ष प्राथमिकता दे रहे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित द्विवाल ने सोमवार को बीजिंग में दो‑दिवसीय विशेष प्रतिनिधियों की बैठक के लिए पहुंच कर वांग यी के साथ भारत‑चीन सीमा प्रश्न पर चर्चा की। यह मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12‑13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित की जा रही है।

दोनों देशों के बीच 2020 के गलवान घाटी टकराव और लद्दाख में लगातार सैन्य तनाव के बाद से संबंधों में खतरनाक तनाव रहा था, परन्तु इस बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत की विदेश मंत्रालय के अनुसार, द्विवाल इस दौरान चीनी उपराष्ट्रपति हैन झेंग से भी मुलाकात करेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत‑चीन सीमा विवाद 3,488 किमी की लम्बी रेखा पर फैला है, जिसे 2003 में स्थापित विशेष प्रतिनिधियों के तंत्र के माध्यम से हल करने का प्रयास किया गया है। 2022 में 24वीं दौर की बातचीत ने कई बिंदुओं पर समझौता किया, परन्तु पूरी तरह से समाधान नहीं हो पाया। इस तंत्र को दोनों पक्षों ने विवाद के पुनरावर्तन को रोकने के लिए एक उपयोगी मंच माना है।

ब्यापार, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे व्यापक मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच संवाद चल रहा है। विदेशी मामलों के मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति ही दोनो देशों के अच्छे संबंधों की नींव है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस वार्ता की सफलता न केवल भारत‑चीन सीमा तनाव को कम कर सकती है, बल्कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के सहयोगी मंच को सुदृढ़ कर सकती है, जिससे वैश्विक आर्थिक सहयोग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

"सीमा संवाद में प्रगति का अर्थ है दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी में नई संभावनाएं," अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ प्रो. रवीन्द्र सिंह ने कहा।
Did You Know?: 2003 में स्थापित विशेष प्रतिनिधियों का तंत्र अब तक 30 से अधिक दौर की सफल बातचीत कर चुका है।

Frequently Asked Questions

  1. विशेष प्रतिनिधियों का तंत्र क्यों महत्वपूर्ण है? यह तंत्र दोनों देशों को सीमा विवाद के निराकरण हेतु एक स्थिर, नियमित और उच्च-स्तरीय मंच प्रदान करता है।
  2. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भारत‑चीन संबंधों पर क्या असर हो सकता है? शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठकें तनाव को कम कर सहयोग के नए क्षेत्रों को उभारा सकती हैं।