विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मास्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जहां ऊर्जा, उर्वरक और हाई-टेक क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई। यह बैठक पीएम मोदी और पुतिन के आगामी एससीओ और ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से पहले एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है।
- ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा और उच्च तकनीक क्षेत्रों को द्विपक्षीय सहयोग में प्राथमिकता दी गई।
- 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने पर सहमति।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की जल्द ही एससीओ (किर्गिस्तान) और ब्रिक्स (नई दिल्ली) शिखर सम्मेलनों में मुलाकात होगी।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक उच्च-स्तरीय बैठक की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को आधुनिक बना रहा है। राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस, भारत के साथ अपने संबंधों में ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
बैठक के दौरान, पुतिन ने द्विपक्षीय व्यापार में हुई वृद्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में व्यापारिक संबंधों में जो मजबूती आई है, वह दोनों देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास का परिणाम है। भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो वर्तमान व्यापार आंकड़ों से काफी अधिक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, रूस के साथ भारत का यह गहराता संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में भारत की स्थिति को मजबूत करता है। विशेष रूप से उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए जीवनरेखा के समान है, जबकि परमाणु और हाई-टेक सहयोग भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
जयशंकर ने रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मान्टुरोव के साथ भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को जमीन पर उतारना है। बैठक में परमाणु ऊर्जा और उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया।
"भारत और रूस के बीच का संबंध अब केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक और तकनीकी साझेदारी में बदल रहा है।"
आगामी हफ्तों में कूटनीतिक गतिविधियां और तेज होने वाली हैं। प्रधानमंत्री मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की यात्रा करेंगे और उसके बाद 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके बाद, 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है।
| वित्तीय वर्ष | द्विपक्षीय व्यापार (अरब डॉलर में) |
|---|---|
| FY 2024-25 | 68.7 |
| FY 2025-26 | 59.86 |
| लक्ष्य (2030) | 100.0 |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: भारत और रूस के बीच व्यापार का लक्ष्य क्या है?
उत्तर: दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
प्रश्न 2: आगामी शिखर सम्मेलनों का कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात पहले किर्गिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन और फिर नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान होगी।