विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जहाँ व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु सहयोग को गहरा करने का इरादा जाहिर किया गया। दो‑दिवसीय दौरे के दौरान दोनों देशों ने 2030 तक $100 बिलियन व्यापार लक्ष्य पर भी चर्चा की।
- भारत‑रूस व्यापार 2025‑26 में $60 बिलियन तक पहुंचा
- परमाणु ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में नई समझौते
- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार $100 बिलियन लक्ष्य
सचिव एस. जयशंकर ने 24 अगस्त को मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ दो‑दिवसीय यात्रा के दौरान आर्थिक, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु सहयोग पर विस्तृत वार्ता की। यह मुलाकात आगामी एससीओ (किर्गिज़स्तान) और बीआरआईसीएस (नई दिल्ली) शिखर सम्मेलनों की तैयारियों के बीच हुई।
पुतिन ने बताया कि इस वर्ष दोनों देशों के बीच व्यापार में वृद्धि हुई है, जबकि पिछले वर्ष में हल्की गिरावट देखी गई थी। उन्होंने भारत को उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे भारतीय किसानों को लाभ होगा।
जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पुतिन को अभिवादन और भविष्य की वार्ताओं के लिए तैयारियों का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि 2026 के एससीओ शिखर सम्मेलन में दोनों देशों की भागीदारी और बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन में भारत‑रूस सहयोग की नई दिशा तय होगी।
रूसी प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ हुई दो‑तरफ़ा बैठक में यह उजागर किया गया कि 2021‑22 के $13 बिलियन से बढ़कर 2025‑26 में व्यापार लगभग $60 बिलियन हो गया है, यानी चार गुना वृद्धि। हालांकि व्यापार असंतुलन भी बढ़ा, $6.6 बिलियन से $50 बिलियन से अधिक हो गया। जयशंकर ने इसे संबोधित करने के लिए टैरिफ, गैर‑टैरिफ बाधाओं को हटाने और भुगतान तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $100 बिलियन तक ले जाने के लिए रणनीतिक योजनाएँ तैयार करने का लक्ष्य रखा। इस दिशा में ऊर्जा, परमाणु प्रौद्योगिकी, विज्ञान‑प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान‑प्रदान को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
जैशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की, जहाँ वे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, विशेषकर यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श करेंगे। यह बैठक एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को सुदृढ़ करने के इरादे को दर्शाती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the accelerating India‑Russia economic partnership not only diversifies Delhi’s supply chains amid Western sanctions but also positions both nations as pivotal players in shaping the upcoming SCO and BRICS agendas.
"India‑Russia trade dynamics are reshaping the geopolitical balance in Eurasia," says Dr. Ananya Sharma, senior fellow at the Institute for Strategic Studies.
Frequently Asked Questions
Q1: भारत‑रूस व्यापार लक्ष्य $100 बिलियन कब तक पूरा होगा?
A: दोनों पक्ष 2030 तक इस लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता जताते हैं।
Q2: परमाणु सहयोग में किस प्रकार के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं?
A: नई परमाणु रिएक्टर निर्माण, ईंधन आपूर्ति और सुरक्षा तकनीक पर सहयोग बढ़ाने की योजना है।