एक प्रमुख इमिग्रेशन वकील ने स्पष्ट किया कि $103,265 के नए H‑1B शुल्क नियम अभी अंतिम रूप नहीं लिये गये हैं। इस बीच, अमेरिकी सरकार का प्रस्ताव भारतीय तकनीकी पेशेवरों पर भारी आर्थिक दबाव डाल सकता है।

  • नया $103,265 शुल्क अभी लागू नहीं हुआ
  • वकील ने कहा नियम अभी अंतिम नहीं
  • हिंदुस्तानी पेशेवरों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा

नया शुल्क प्रस्ताव

संयुक्त राज्य सरकार ने H‑1B कार्य वीज़ा के लिए $103,265 का छः अंकों वाला शुल्क प्रस्तावित किया है, जिससे पहले के $2,500‑$5,000 के शुल्क में भारी वृद्धि होगी। यह कदम ट्रम्प प्रशासन के दौरान शुरू हुआ और बाइडेन सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से अंतिम नहीं किया है।

वकील की टिप्पणी

इमिग्रेशन विशेषज्ञ एडमिशन रॉय ने कहा, “अभी तक इस नियम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है; संभावित संशोधन अभी भी हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि कई कंपनियों ने इस नई लागत को लेकर अपने H‑1B स्पॉन्सरशिप योजनाओं को पुनः मूल्यांकित किया है।

भारतीय पेशेवरों के लिए क्या मतलब है?

इंटरनेट पर कई भारतीय तकनीकी पेशेवरों ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि यह उनकी यू.एस. नौकरियों की लागत को असहनीय बना सकता है। कई स्टार्ट‑अप और छोटे व्यवसायों ने पहले ही इस शुल्क को वहन करने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that a six‑figure visa fee could reshape the talent pipeline from India to the United States, potentially slowing down the flow of skilled engineers and affecting US tech competitiveness.

“If the fee stays at six figures, only the largest corporations will be able to sponsor H‑1B talent, marginalising smaller innovators.” – Immigration economist Dr. Priya Mehta

पुराने बनाम नए शुल्क तुलना

शुल्क प्रकारपहले (USD)नया प्रस्ताव (USD)
बेसिक आवेदन शुल्क2,500100,000‑103,265
प्रोसेसिंग शुल्क1,500विकल्पीय, अभी तय नहीं
Did You Know?: 2020 में H‑1B वीज़ा की कुल मंजूरी लगभग 85,000 थी, जबकि 2024 में संभावित शुल्क वृद्धि के कारण यह संख्या घटने की संभावना है।

Frequently Asked Questions

Q: क्या नया शुल्क अभी लागू हो चुका है?
A: नहीं, अभी भी संशोधन की प्रक्रिया चल रही है और अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

Q: इस शुल्क का भारतीय आईटी कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
A: छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों को स्पॉन्सर करने में आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जिससे वे प्रतिभा को विदेश भेजने से हिचकिचा सकती हैं।