भारत और रूस के बीच हाल ही में कार्यान्वित लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट (RELOS) को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैल रही हैं। इस लेख में बताया गया है कि समझौता वास्तव में क्या अनुमति देता है और क्यों यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है।
- RELOS एक लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता है, न कि स्थायी सैनिक तैनाती का अनुबंध।
- यह दोनों देशों को बेस, बंदरगाह और हवाई अड्डे का आपसी उपयोग करने की सुविधा देता है।
- अधिकतम 3,000 सैनिकों की सीमा केवल संयुक्त अभ्यास या मानवीय मिशन के दौरान लागू होती है।
लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट (LSA) क्या है?
एक LSA दो देशों के बीच प्रशासनिक स्तर पर सैन्य सहयोग को सरल बनाता है। इसके तहत आपूर्ति, मरम्मत, ईंधन, भोजन, पानी और चिकित्सा जैसी बुनियादी सेवाओं का आपसी उपयोग किया जा सकता है। यह समझौता सामान्यतः संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, पोर्ट कॉल और मानवीय सहायता व आपदा राहत (HADR) के लिए लागू होता है।
दुनिया भर में समान समझौते
भारत ने 2016 के बाद से नौ देशों—अमेरिका, यूके, फ्रांस, वियतनाम, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, ओमान और रूस—के साथ समान LSA पर हस्ताक्षर किए हैं। इन सभी में मूल रूप से वही शर्तें हैं: बुनियादी लॉजिस्टिक सेवाओं का आपसी उपयोग, बिना किसी स्थायी बेस की स्थापना के।
रूस के साथ RELOS का विवरण
रूस के साथ RELOS 18 फरवरी 2025 को मॉस्को में हस्ताक्षरित हुआ और 15 दिसंबर 2025 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे विधि रूप में मंजूरी दी। यह समझौता युद्धपोतों के पोर्ट कॉल, हवाई अड्डे की सुविधाओं के उपयोग, और सैन्य इकाइयों की तकनीकी सहायता को नियमन करता है। इसमें संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, HADR मिशन और आपूर्ति एवं मरम्मत सेवाएँ शामिल हैं।
भ्रम क्यों उत्पन्न हुआ?
सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि RELOS के तहत भारत या रूस में 3,000 सैनिकों की स्थायी तैनाती संभव है, जिससे इसे सैन्य गठबंधन माना गया। वास्तविकता में यह सीमा केवल संयुक्त अभ्यास या मानवीय ऑपरेशन के दौरान लागू होती है, और किसी भी देश को स्थायी रूप से सैनिक रखने की अनुमति नहीं देती। इसी प्रकार, अमेरिका‑भारत LEMOA समझौता भी ऐसी ही शर्तें रखता है, लेकिन इसे कभी भी बेस निर्माण के रूप में नहीं देखा गया।
रणनीतिक महत्व
BozokMedia analysis shows कि RELOS भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाता है, विशेषकर भारत‑चीन सीमा तनाव के समय में। यह समझौता भारतीय सेना को तेज़ी से लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करता है, जिससे वे दूरस्थ क्षेत्रों में अधिक समय तक ऑपरेट कर सकते हैं।
"RELOS एक प्रशासनिक उपकरण है, न कि सैन्य गठबंधन; इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में तेज़ प्रतिक्रिया को सक्षम बनाना है," कहा एक रक्षा विशेषज्ञ ने।
Why This Matters
इस समझौते से भारत को न केवल रूस के पोर्ट और हवाई अड्डों का उपयोग मिल रहा है, बल्कि यह भारत की वैश्विक रक्षा नेटवर्क में एक नया कड़ी जोड़ता है, जिससे सामरिक लचीलापन बढ़ता है।
Frequently Asked Questions
क्या RELOS के तहत भारतीय सेना रूसी भूमि में 3,000 सैनिक तैनात कर सकती है? नहीं, यह सीमा केवल संयुक्त अभ्यास या मानवीय मिशन के दौरान अस्थायी उपयोग के लिए है।
क्या यह समझौता भारत‑रूस को सैन्य गठबंधन बनाता है? नहीं, यह केवल लॉजिस्टिक सहयोग को आसान बनाता है, न कि स्थायी सैन्य सहयोग या बेस निर्माण।