इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा युद्ध के दौरान धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन संदर्भों का उपयोग करके सैन्य कार्रवाइयों को वैध बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति का गहरा विश्लेषण।
- नेतन्याहू ने 'अमालक' जैसे धार्मिक संदर्भों का उपयोग करके युद्ध की आक्रामकता को बढ़ाया है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दक्षिण अफ्रीकी वकीलों ने इसे नरसंहार के इरादे के रूप में पेश किया है।
- इजरायली नेतृत्व द्वारा फिलिस्तीनियों के लिए 'मानव पशु' जैसे मानवीकरण विरोधी शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है।
- पश्चिम बैंक में बस्तियों के विस्तार के लिए धार्मिक आधार का सहारा लिया जा रहा है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने वैश्विक स्तर पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। वेस्ट यरूशलेम के वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में एक महत्वपूर्ण यहूदी सम्मेलन के दौरान, नेतन्याहू ने सुरक्षा सिद्धांत में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया। उन्होंने एक प्राचीन हिब्रू वाक्यांश का उपयोग किया जिसका अर्थ है, "यदि कोई आपको मारने आए, तो उठें और पहले उसे मार दें," जिसे उन्होंने सरल अंग्रेजी में "उन्हें पहले मार डालो" के रूप में प्रस्तुत किया।
यह बयान केवल एक सैन्य रणनीति नहीं है, बल्कि यह प्राचीन धार्मिक ग्रंथों को आधुनिक युद्ध कौशल के साथ जोड़ने का एक प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भाषा का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाओं को दरकिनार करने और युद्ध को एक 'अस्तित्ववादी पवित्र युद्ध' के रूप में चित्रित करने के लिए किया जा रहा है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जब राजनीतिक नेता धार्मिक शब्दावली का उपयोग करते हैं, तो वे जटिल भू-राजनीतिक संघर्षों को 'नैतिक नाटक' में बदल देते हैं। इससे संघर्ष का समाधान करना और भी कठिन हो जाता है क्योंकि युद्ध अब केवल जमीन या शक्ति के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक पहचान और अस्तित्व के लिए लड़ा जा रहा है।
युद्ध स्वयं धर्मशास्त्रीय नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक है, लेकिन इसके इर्द-गिर्द की भाषा पवित्र छवियों का सहारा ले रही है।
जनवरी 2024 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की सुनवाई के दौरान, दक्षिण अफ्रीकी वकील तेम्बका नगकुकैटोबी ने नेतन्याहू के एक आदेश का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने इजरायली सैनिकों को "याद दिलाने" को कहा था कि "अमालक ने तुम्हारे साथ क्या किया है"। यह बाइबिल के उस आदेश की ओर इशारा करता है जिसमें एक पूरे समूह के विनाश का निर्देश दिया गया था। कानूनी विशेषज्ञों ने इसे गाजा में नरसंहार के इरादे के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया है।
यह प्रवृत्ति केवल नेतन्याहू तक सीमित नहीं है। पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने गाजा की घेराबंदी की घोषणा करते समय फिलिस्तीनियों को "मानव पशु" कहा था। हालांकि यह सीधे तौर पर धार्मिक नहीं था, लेकिन यह उसी मानवीकरण विरोधी विचारधारा का हिस्सा है जो युद्ध को और अधिक हिंसक बनाती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इजरायल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन, जो एक धर्मनिरपेक्ष ज़ायोनी थे, ने भी युद्ध के समय बाइबिल के संदर्भों का उपयोग किया था। हालांकि, वर्तमान में धार्मिक कट्टरपंथ का स्तर बहुत अधिक बढ़ गया है। वित्त मंत्री बेज़ालल स्मोटरिच जैसे नेता पश्चिम बैंक को 'जुडिया और सामरिया' के बाइबिल नाम से पुकारते हैं और वहां बस्तियों के विस्तार को धार्मिक अधिकार मानते हैं।
इजरायली सरकार ने हाल ही में पश्चिम बैंक में कब्जे को मजबूत करने के लिए $271 बिलियन के बजट में अभूतपूर्व धनराशि आवंटित की है, जिससे वहां पहले से रह रहे 700,000 से अधिक बसने वालों की स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'अमालक' का संदर्भ क्या है?
उत्तर: यह बाइबिल का एक संदर्भ है जो एक पूरे समूह के पूर्ण विनाश का आदेश देता है, जिसका उपयोग नेतन्याहू द्वारा सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए किया गया है।
प्रश्न 2: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और अन्य मानवाधिकार समूहों ने इस तरह की भाषा को युद्ध अपराधों और नरसंहार के संकेत के रूप में देखा है।