विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ यूक्रेन, व्यापार और BRICS जैसे वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। यह बैठक आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

  • एस जयशंकर और सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन, ईरान और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
  • आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को गहरा करने पर सहमति बनी।
  • व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु सहयोग के क्षेत्रों में विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मॉस्को में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस वार्ता का मुख्य केंद्र द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना था। रूस की आधिकारिक समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, दोनों नेताओं ने यूक्रेन संकट, ईरान और अफगानिस्तान की स्थिति पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।

यह राजनयिक यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण समय पर हो रही है, क्योंकि यह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी नई दिल्ली यात्रा की पूर्व संध्या पर है। पुतिन 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सामरिक तालमेल को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत और रूस के बीच यह संवाद केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बहुपक्षीय मंचों जैसे कि संयुक्त राष्ट्र (UN), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और G20 में एक साझा दृष्टिकोण बनाने की कोशिश है। वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, भारत की रूस के साथ बढ़ती निकटता वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

भारत और रूस के बीच बढ़ता समन्वय वैश्विक बहुध्रुवीयता की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है।

बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग पर विशेष बल दिया गया। जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात की, जहां व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की, जिसका उद्देश्य तकनीकी और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं, जो शीत युद्ध के युग से लेकर वर्तमान तक अटूट रहे हैं। रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे का समर्थन किया है, जो आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

Did You Know?: भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंध ऊर्जा और रक्षा के अलावा अब अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक के क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions

1. जयशंकर की मॉस्को यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, व्यापारिक सहयोग बढ़ाना और यूक्रेन व BRICS जैसे वैश्विक मुद्दों पर समन्वय स्थापित करना है।

2. आगामी BRICS शिखर सम्मेलन कब और कहां होगा?
BRICS शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को भारत में आयोजित किया जाएगा।