श्रीलंका सरकार की हरित ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के बीच मन्नार द्वीप के स्थानीय निवासी पर्यावरणीय गिरावट और आजीविका के नुकसान का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने फ्लैश फ्लड और घटती मछली पकड़ने की उपज जैसे गंभीर मुद्दे उठाए हैं।

  • मन्नार द्वीप पर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के कारण स्थानीय समुदायों में पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ी हैं।
  • निवासियों ने जलभराव, तटीय कटाव और मछली पकड़ने के संसाधनों में कमी की शिकायत की है।
  • अडानी ग्रीन एनर्जी जैसे बड़े निवेशों के बाद भी स्थानीय सहमति और वैज्ञानिक शोध की कमी बनी हुई है।

श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित मन्नार जिला पिछले एक दशक से देश के हरित ऊर्जा संक्रमण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ की तेज हवाओं का लाभ उठाने के लिए सरकार और निजी कंपनियों ने कई पवन ऊर्जा परियोजनाओं की शुरुआत की है। हालाँकि, इन परियोजनाओं ने स्थानीय समुदायों के बीच गहरा डर पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन विशाल पवन टर्बाइनों के कारण उनके प्राकृतिक जल निकासी मार्ग बदल गए हैं, जिससे अब बार-बार 'फ्लैश फ्लड' (अचानक बाढ़) की स्थिति बन रही है।

स्थानीय निवासी और मछुआरे बताते हैं कि तटरेखा का कटाव बढ़ गया है और समुद्र में मछलियों की संख्या कम हो गई है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। कारिटास वाल्वुथायम के निदेशक फादर जी. ए. अरुलराज क्रूस के अनुसार, यह केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। उनका तर्क है कि जहाँ अधिकारी वैज्ञानिक प्रमाण मांगते हैं, वहीं लोगों का दैनिक अनुभव इस विनाश की गवाही दे रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला 'टॉप-डाउन' विकास मॉडल की विफलता को दर्शाता है। जब बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स स्थानीय पारिस्थितिकी और सामुदायिक सहमति को नजरअंदाज करते हैं, तो वे 'हरित' होने के बावजूद सामाजिक रूप से अस्थिर हो जाते हैं। मन्नार का संकट यह साबित करता है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने के प्रयास स्थानीय लोगों की कीमत पर नहीं होने चाहिए।

"विकास वह नहीं है जो ऊपर से थोपा जाए, बल्कि वह है जो स्थानीय आवश्यकताओं और पारिस्थितिक संतुलन के साथ मेल खाए।"

ऐतिहासिक रूप से, मन्नार द्वीप अपनी रणनीतिक स्थिति और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ थम्बापवनी पवन परियोजना जैसी शुरुआती पहलें की गईं, जिन्हें एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्तपोषित किया गया था। बाद में, अडानी समूह के साथ 500 मेगावाट की एक बड़ी परियोजना पर समझौता हुआ, जिसने राजनीतिक और कानूनी विवादों को जन्म दिया। हालांकि अडानी ग्रीन ने बाद में इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिया, लेकिन स्थानीय लोगों के मन में डर अब भी बरकरार है।

वर्तमान में, राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की सरकार ने मन्नार द्वीप पर नई पवन ऊर्जा परियोजनाओं को तब तक रोकने का निर्णय लिया है जब तक कि स्थानीय निवासियों की सहमति प्राप्त नहीं हो जाती। यह कदम पर्यावरण समूहों और प्रवासी पक्षियों (विशेषकर फ्लेमिंगो) के गलियारे को बचाने की कोशिशों का हिस्सा है।

परियोजना / पहलू थम्बापवनी प्रोजेक्ट अडानी ग्रीन प्रोजेक्ट (प्रस्तावित)
क्षमता 104 MW 500 MW
वित्तपोषण/स्रोत एशियाई विकास बैंक (ADB) निजी निवेश ($500 मिलियन)
वर्तमान स्थिति सक्रिय वापस लिया गया (Withdrawn)
क्या आप जानते हैं?: मन्नार द्वीप श्रीलंका का वह बिंदु है जो भारत के सबसे करीब है और यहाँ से रामेश्वरम की दूरी बहुत कम है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण समुद्री और वायु मार्ग बनता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मन्नार के लोग पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: स्थानीय लोगों का मानना है कि टर्बाइनों के कारण जल निकासी बाधित हुई है, जिससे बाढ़ आ रही है और उनकी मछली पकड़ने की आजीविका प्रभावित हो रही है।

प्रश्न 2: श्रीलंका सरकार ने अब क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: राष्ट्रपति दिसानायके ने निर्देश दिया है कि मन्नार द्वीप के लोगों की सहमति के बिना कोई भी नई पवन ऊर्जा परियोजना शुरू नहीं की जाएगी।