दक्षिणपंथी इजरायली सांसद ज़वी सुक्कोट ने सैन्य सुरक्षा के बीच वेस्ट बैंक में एक फिलिस्तीनी स्मारक को हथौड़े से तोड़ दिया, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
- इजरायली सांसद ज़वी सुक्कोट ने मदमा गांव में एक ऐतिहासिक फिलिस्तीनी स्मारक को हथौड़े से क्षतिग्रस्त किया।
- घटना के दौरान इजरायली सेना (IDF) सुरक्षा प्रदान कर रही थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे अनधिकृत बताया।
- प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस कृत्य की निंदा की है, जबकि वित्त मंत्री स्मोट्रिच ने विरोधियों पर निशाना साधा है।
वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव मदमा में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां इजरायली संसद के कट्टरपंथी दक्षिणपंथी सदस्य ज़वी सुक्कोट ने एक हथौड़े का उपयोग करके एक ऐतिहासिक फिलिस्तीनी स्मारक को भारी नुकसान पहुंचाया। वीडियो फुटेज से पता चलता है कि सुक्कोट, जो 'रिलिजियस ज़ायनिज़्म' पार्टी से संबंधित हैं, सैन्य सुरक्षा के घेरे में इस स्मारक पर प्रहार कर रहे थे।
सुक्कोट ने इस कृत्य को उचित ठहराते हुए कहा, "हम इसे यहाँ खड़ा नहीं छोड़ सकते, क्योंकि जो भी स्थान आतंकवाद का महिमामंडन करता है, हमें उसे हटाना ही होगा।" हालांकि, स्थानीय ग्राम परिषद के प्रमुख रामी नासर ने स्पष्ट किया कि यह स्मारक 2008 में उन फिलिस्तीनियों की याद में बनाया गया था जो 1968 के कारामे के युद्ध और प्रथम एवं द्वितीय इंतिफादा के दौरान मारे गए थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की घटनाएं वेस्ट बैंक में बढ़ते सेटलर हिंसा के पैटर्न को दर्शाती हैं। यह न केवल स्थानीय तनाव को बढ़ाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। सैन्य सुरक्षा की उपस्थिति में इस तरह की कार्रवाई कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
सार्वजनिक हस्तियों द्वारा कानून अपने हाथ में लेना एक निंदनीय कृत्य है जो सेना को अपने मुख्य मिशन से भटकाता है।
इस घटना पर इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने कहा कि उन्होंने सुक्कोट के लिए क्षेत्र का दौरा अनुमोदित किया था, लेकिन वे और उनके साथी धोखे से और बिना किसी आधिकारिक अनुमति के स्मारक को नुकसान पहुंचाने पहुंचे। IDF ने अंततः समूह को गांव से बाहर निकालने के लिए मजबूर किया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं विभाजित हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस कृत्य को 'निंदनीय' बताया है। दूसरी ओर, नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी गाडी आइजनकोट ने इसे एक 'कलंक' बताया और सरकार पर अराजकतावादियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। हालांकि, वित्त मंत्री बेज़ालल स्मोट्रिच ने इस आलोचना को वामपंथी विपक्ष का हमला करार दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह स्मारक 1968 के कारामे के युद्ध की याद दिलाता है, जो इजरायली बलों और फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन (PLO) के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य संघर्ष था। यह स्थान फिलिस्तीनी प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ज़वी सुक्कोट कौन हैं?
उत्तर: वे इजरायली संसद के एक कट्टरपंथी दक्षिणपंथी सदस्य हैं जो रिलिजियस ज़ायनिज़्म पार्टी से जुड़े हैं।
प्रश्न 2: इस घटना पर इजरायली सेना की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर: IDF ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन सांसद ने अनधिकृत रूप से और धोखे से स्मारक को नुकसान पहुंचाया।