विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (UNCERD) की टिप्पणियों को खारिज करते हुए उन्हें दुर्भावनापूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया है। भारत ने कहा कि समिति के आरोप निराधार और बिना सबूत के हैं।

  • भारत ने UNCERD की टिप्पणियों को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' और 'अत्यंत दुर्भावनापूर्ण' करार दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा विभिन्न समुदायों के खिलाफ कथित उल्लंघनों पर चिंता जताई थी।
  • भारत ने अपनी संवैधानिक सुरक्षा उपायों और समावेशी विकास के प्रयासों को दोहराया है।

नई दिल्ली: भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (UNCERD) द्वारा हाल ही में की गई टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' और 'अत्यंत दुर्भावनापूर्ण' बताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधिर जयसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है और इन्हें पूरी अवमानना के साथ देखता है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब UNCERD ने भारत में विभिन्न जातीय और धार्मिक समूहों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति (दलितों), अनुसूचित जनजातियों और गैर-नागरिकों के खिलाफ कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा कथित 'बड़े पैमाने पर उल्लंघनों' की रिपोर्ट पर चिंता व्यक्त की थी। समिति ने भारत में 'हेट स्पीच' और 'हेट क्राइम' को संबोधित करने की भी मांग की थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की संप्रभुता और उसके आंतरिक सुरक्षा ढांचे के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। संयुक्त राष्ट्र की ऐसी टिप्पणियां अक्सर वैश्विक भू-राजनीति में भारत की छवि को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में देखी जाती हैं। भारत का यह तीखा जवाब अंतरराष्ट्रीय दबाव के खिलाफ उसकी मजबूत नीति का संकेत है।

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समीक्षाओं में रचनात्मक रूप से भाग तो लेगा, लेकिन बिना आधार के लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करेगा।

भारत की ओर से जिनेवा में आयोजित इस समीक्षा के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल गया था। MEA ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने समीक्षा बैठक के दौरान ही समिति की 'व्यापक सामान्यीकरण' और 'अपुष्ट आरोपों' की प्रवृत्ति को खारिज कर दिया था। भारत ने जोर देकर कहा कि उसका संवैधानिक ढांचा और कानूनी व्यवस्था सभी वंचित समुदायों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

UNCERD एक स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल है जिसका कार्य 'नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर कन्वेंशन' (ICERD) के कार्यान्वयन की निगरानी करना है। भारत इस कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता है और नियमित अंतराल पर अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। हालिया समीक्षा भारत की 12वीं और 21वीं संयुक्त आवधिक रिपोर्टों पर आधारित थी।

Did You Know?: भारत में आरक्षण और विशेष संवैधानिक प्रावधान दुनिया के सबसे बड़े सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) कार्यक्रमों में से एक हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: UNCERD क्या है?
उत्तर: यह संयुक्त राष्ट्र की एक समिति है जो दुनिया भर में नस्लीय भेदभाव को रोकने और समाप्त करने के लिए काम करती है।

प्रश्न 2: भारत ने इन टिप्पणियों को क्यों खारिज किया?
उत्तर: भारत का मानना है कि ये टिप्पणियां बिना किसी ठोस सबूत के हैं और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं।