पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण भारत की गैस आपूर्ति बदल रही है। कतर और सऊदी अरब से आपूर्ति घटने के बाद अब अमेरिका भारत के लिए LPG और LNG का प्रमुख स्रोत बन गया है।

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण खाड़ी देशों से LPG और LNG की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है।
  • अगस्त में भारत की कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 73% से अधिक रही।
  • कतर से होने वाली LNG आपूर्ति शून्य पर पहुंच गई है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ती अस्थिरता ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से बदल दिया है। समुद्री इंटेलिजेंस फर्म Kpler के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक खाड़ी उत्पादकों से आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत अब अब liquefied petroleum gas (LPG) और liquefied natural gas (LNG) के लिए तेजी से संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर देख रहा है।

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अगस्त के महीने में भारत ने अमेरिका से लगभग 0.62 मिलियन टन LPG आयात की। यह आंकड़ा जुलाई के 0.89 मिलियन टन से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि अगस्त में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत से अधिक रही। इसके विपरीत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात घटकर लगभग 1,40,000 टन रह गया, जबकि कतर से केवल 60,000 टन की आपूर्ति हुई। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में भारत ने सऊदी अरब से कोई LPG नहीं खरीदी।

ऊर्जा आपूर्ति में बड़ा बदलाव

LNG क्षेत्र में भी स्थिति काफी गंभीर है। भारत का सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता रहा कतर, जिसकी आपूर्ति अगस्त में गिरकर शून्य हो गई है। वहीं, अमेरिका से होने वाली LNG आपूर्ति जुलाई के 0.72 मिलियन टन से बढ़कर अगस्त में 0.75 मिलियन टन हो गई है। गौरतलब है कि संकट से पहले कतर एक महीने में भारत को 1.2 मिलियन टन तक LNG की आपूर्ति करता था।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्ग का बाधित होना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम है, जो भारत जैसे बड़े आयातकों को मजबूरन लंबी दूरी के आपूर्तिकर्ता खोजने पर विवश कर रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिका जैसे दूरस्थ देशों पर निर्भरता बढ़ने से भारत की ऊर्जा लागत में वृद्धि होना तय है। खाड़ी देशों की तुलना में अमेरिकी कार्गो को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे शिपिंग लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं। यह न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती है, बल्कि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए केवल एक स्रोत पर निर्भर नहीं है। भारत ने अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने की नीति अपनाई है। रूस के साथ भारत का संबंध मजबूत बना हुआ है, जहां अगस्त में भारत ने प्रतिदिन लगभग 1.87 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया। यह मात्रा यूएई (0.61 मिलियन टन) से होने वाले आयात से तीन गुना से भी अधिक है। इसके अलावा, वेनेजुएला से भी भारत को महत्वपूर्ण मात्रा में कच्चा तेल मिल रहा है।

आपूर्तिकर्ता देशLPG आयात (अगस्त - अनुमानित)LNG स्थिति
संयुक्त राज्य अमेरिका0.62 मिलियन टन (>73%)बढ़ रही है
संयुक्त अरब अमीरात1.40 लाख टनघट रही है
कतर60,000 टनशून्य पर
सऊदी अरबशून्यशून्य
Did You Know?: हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तरल प्राकृतिक गैस का प्रवाह होता है।

Frequently Asked Questions

1. भारत के लिए अमेरिका से गैस आयात क्यों बढ़ रहा है?
पश्चिम एशिया में संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा जोखिमों के कारण खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे भारत अब अमेरिका की ओर रुख कर रहा है।

2. क्या इससे भारत में गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं?
हाँ, क्योंकि अमेरिकी कार्गो को खाड़ी देशों की तुलना में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे परिवहन लागत बढ़ जाती है।