ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन के बढ़ते खतरे के बीच 2.1 लाख सैन्य ड्रोन खरीदने के लिए 6.6 बिलियन डॉलर के विशेष बजट की वकालत की है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्धों ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन की अनिवार्यता को साबित कर दिया है।

  • ताइवान सरकार 2,10,000 नए सैन्य ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है।
  • राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इसके लिए 210 बिलियन ताइवानी डॉलर (6.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के विशेष बजट की मांग की है।
  • विपक्ष इस खर्च पर सीमा लगाने और इसे रक्षा मंत्रालय के बजाय अर्थव्यवस्था मंत्रालय के नियंत्रण में रखने का प्रस्ताव दे रहा है।
  • लक्ष्य एक 'गैर-लाल' (Non-Red) आपूर्ति श्रृंखला बनाना है जो चीन पर निर्भर न हो।

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने बुधवार को विपक्षी नियंत्रण वाले संसद में एक महत्वपूर्ण मतदान से पहले, सैन्य ड्रोन की खरीद के लिए छह साल की अवधि के लिए 210 बिलियन ताइवानी डॉलर (लगभग 6.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के विशेष बजट को पारित करने का आह्वान किया। ताइवान सरकार का तर्क है कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए 2,10,000 नए सैन्य ड्रोन खरीदने की योजना में देरी नहीं की जा सकती।

यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना चालक वाले हथियार (uncrewed weapons) आधुनिक युद्धक्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। राष्ट्रपति लाई ने कहा कि ये ड्रोन ताइवान की 'असममित' (asymmetric) युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण घटक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल रक्षा तैयारियों का मामला नहीं है, बल्कि ताइवान के आत्मरक्षा के संकल्प का प्रदर्शन भी है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि ताइवान का यह कदम केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। चीन, जो ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, के खिलाफ एक 'हेलस्केप' (hellscape) बनाने की रणनीति के तहत इन ड्रोनों का उपयोग किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित आक्रमण की स्थिति में चीनी सैन्य शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया जा सके।

ड्रोन तकनीक में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण, एकमुश्त भारी खरीदारी के बजाय निरंतर अपग्रेडेशन और वार्षिक खरीद अधिक प्रभावी हो सकती है।

हालांकि, ताइवान की संसद में विपक्षी दल कुओमिन्तांग (KMT) इस बड़े खर्च का विरोध कर रहा है। विपक्षी नेता लाई शिह-बाओ का तर्क है कि तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि एक साथ बड़ी मात्रा में खरीदारी करने से उपकरण जल्द ही पुराने (out-of-date) हो सकते हैं। उन्होंने प्रति वर्ष खर्च को 40 बिलियन ताइवानी डॉलर तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है।

रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने विपक्ष के तर्कों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार की योजना में नियमित अपग्रेडेशन शामिल है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा प्रस्तावित 40 बिलियन डॉलर की सीमा ताइवान की ड्रोन क्षमताओं के निर्माण में बाधा उत्पन्न करेगी, क्योंकि केवल 2027 में ही ड्रोन पर 42.1 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ताइवान और चीन के बीच तनाव दशकों पुराना है। चीन ताइवान को एक अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता देने से इनकार करता है और 'एक चीन' नीति पर जोर देता है। हाल के वर्षों में, ताइवान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 'असममित युद्ध रणनीति' पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें ड्रोन, मिसाइलें और अन्य आधुनिक तकनीकें शामिल हैं ताकि चीन की विशाल सैन्य शक्ति का मुकाबला किया जा सके।

Did You Know?: ताइवान एक ऐसी आपूर्ति श्रृंखला बनाने की कोशिश कर रहा है जिसे 'Non-Red' कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि इसमें चीन के तकनीकी घटकों का उपयोग नहीं किया जाएगा।

Frequently Asked Questions

1. ताइवान इतने सारे ड्रोन क्यों खरीदना चाहता है?
ताइवान अपनी 'असममित' युद्ध क्षमता को बढ़ाना चाहता है ताकि किसी भी चीनी आक्रमण की स्थिति में युद्धक्षेत्र को चीनी सेना के लिए अत्यंत कठिन बना दिया जाए।

2. विपक्ष का मुख्य विरोध क्या है?
विपक्ष का मानना है कि एक साथ इतना बड़ा बजट खर्च करना जोखिम भरा है क्योंकि ड्रोन तकनीक बहुत तेजी से बदलती है, जिससे उपकरण जल्दी पुराने हो सकते हैं।