हिमालय में एक विशाल ग्लेशियर के ढहने से नेपाल और तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़ आ गई है, जिसमें कम से कम 160 लोगों की जान चली गई है और लगभग 1,500 लोग लापता हैं।
- हिमालय में ग्लेशियर के ढहने से नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़ और भूस्खलन।
- कुल 160 मौतें की पुष्टि, 1,500 लोग लापता, जिनमें 800 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
- त्रिशुली नदी का जलस्तर मात्र 30 मिनट में 9 मीटर तक बढ़ गया।
- नेपाल के रासुवा और तिब्बत के ग्यारोंग काउंटी में सबसे अधिक नुकसान।
बुधवार सुबह हिमालय की ऊंचाइयों पर एक विशाल ग्लेशियर के अचानक ढहने से नेपाल और चीन के तिब्बत सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रलयकारी बाढ़ आ गई है। इस प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जिससे अब तक कम से कम 160 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि नेपाल और तिब्बत दोनों ओर मिलाकर लगभग 1,500 लोग लापता हैं, जिनमें 800 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।
विनाश का मुख्य कारण: ग्लेशियर का ढहना
यह आपदा तब शुरू हुई जब लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे की ओर गिरा। उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि बर्फ और चट्टानों का यह विशाल ढेर लगभग 1,200 मीटर की ऊंचाई से घाटी में गिरा, जिससे एक शक्तिशाली हिम-चट्टान का हिमस्खलन (ice-rock avalanche) हुआ। इसने तिब्बत में लेंदहे नदी के मार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे एक प्राकृतिक बांध बन गया। जब यह बांध टूटा, तो पानी का एक प्रचंड सैलाब नीचे की ओर आया, जिसने गांवों और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया।
क्षेत्रीय प्रभाव और बुनियादी ढांचे की क्षति
नेपाल में, इस बाढ़ ने लेंदहे खोला नदी घाटी को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया। त्रिशुली नदी का जलस्तर मात्र 30 मिनट के भीतर 9 मीटर (27 फीट) तक बढ़ गया, जिससे भारी तबाही हुई। नेपाल के रासुवा जिले के अलावा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भी घर और सड़कें बह गईं। बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसमें कम से कम 19 पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़कें बह गई हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और अस्थिर होना अब केवल एक पर्यावरणीय चेतावनी नहीं, बल्कि एक तत्काल मानवीय संकट बन गया है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे एक स्थानीय भूवैज्ञानिक घटना वैश्विक स्तर पर पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
ग्लेशियरों की अस्थिरता और अचानक आने वाली ये बाढ़ हिमालयी देशों के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन रही हैं।
लापता लोगों में भारत के 177, अमेरिका के 63, ऑस्ट्रेलिया के 34 और यूके के 33 नागरिक शामिल हैं। बचाव कार्य में सेना, हेलीकॉप्टर और ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन कीचड़ और उफनती नदियों के कारण राहत कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस आपदा का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: एक विशाल ग्लेशियर का 5,200 मीटर की ऊंचाई से ढहना और उसके बाद आई बर्फ-चट्टान की सुनामी इसका मुख्य कारण थी।
प्रश्न 2: क्या यह भूकंप के कारण हुआ था?
उत्तर: शुरुआत में भूकंप की आशंका थी, लेकिन USGS के अनुसार, भूकंपीय संकेत वास्तव में भूस्खलन की तीव्रता के कारण उत्पन्न हुए थे।