प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी मध्य एशिया यात्रा भारत की रणनीतिक उपस्थिति, आर्थिक संबंधों और राजनयिक प्रभाव को गहरा करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखी जा रही है। यह यात्रा इस क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा और SCO शिखर सम्मेलन में भागीदारी रणनीतिक महत्व की है।
  • भारत, रूस और चीन के बीच स्थित इस भू-आबद्ध (landlocked) क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।
  • कनेक्टिविटी की कमी के बावजूद, भारत के सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध अत्यंत गहरे हैं।
  • आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और अफगानिस्तान की स्थिति पर उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी मध्य एशिया यात्रा भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उनकी यात्रा का पहला पड़ाव उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा होगी, जिसके बाद वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। बिश्केक का नाम बदलना केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह एक नए उभरते क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।

मध्य एशिया एक ऐसा क्षेत्र है जो दो महाशक्तियों, रूस और चीन के बीच स्थित है। यहाँ की राजनीति और सुरक्षा चुनौतियाँ जटिल हैं। कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई यहाँ की प्राथमिकता है, विशेष रूप से 2024 के मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल आतंकी हमले और अफगानिस्तान से उत्पन्न अस्थिरता के बाद। भारत के लिए यह क्षेत्र न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक और सभ्यतागत रूप से भी भारत के निकट है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अब मध्य एशिया को केवल एक दूरस्थ क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि अपने 'पड़ोस' के रूप में देख रहा है। रूस का प्रभाव कम होने और चीन का विस्तार बढ़ने के बीच, मध्य एशियाई देश अब विकास के लिए नए भागीदारों की तलाश कर रहे हैं। भारत की लोकतांत्रिक और बहुलवादी छवि इस क्षेत्र में एक विश्वसनीय विकल्प पेश करती है।

कनेक्टिविटी की कमी भारत के उन सभ्यतागत संबंधों को कम नहीं कर सकती जो इस क्षेत्र के साथ सदियों से जुड़े हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की 2015 की यात्रा ने भारत की उस पुरानी नीति को समाप्त कर दिया था जिसमें भारत रूस के प्रभाव क्षेत्र में हस्तक्षेप करने से बचता था। 2022 में मध्य एशियाई नेताओं को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। आज भारत व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने के लिए तैयार है।

उज्बेकिस्तान के साथ संबंध विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रपति मीरज़ियोयेव के नेतृत्व में उज्बेकिस्तान ने अपनी विदेश नीति में विविधता लाई है और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अफगानिस्तान के संदर्भ में उज्बेकिस्तान का व्यावहारिक दृष्टिकोण भारत के लिए अत्यंत उपयोगी है, खासकर जब भारत ईरान और अफगानिस्तान के माध्यम से वैकल्पिक रेल और सड़क मार्गों की तलाश कर रहा है।

Did You Know?: भारत और ताजिकिस्तान भौगोलिक रूप से अफगानिस्तान के संकीर्ण वाखान कॉरिडोर के माध्यम से एक-दूसरे के बहुत करीब हैं।

Frequently Asked Questions

1. SCO क्या है और भारत इसमें क्यों शामिल है?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है। भारत इसमें भूगोल और क्षेत्रीय सुरक्षा के आधार पर शामिल है, ताकि चीन-पाकिस्तान गठबंधन के बीच अपने हितों की रक्षा कर सके।

2. मध्य एशिया में भारत की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान द्वारा बनाई गई भौतिक बाधाएं और overland connectivity (थल मार्ग से जुड़ाव) की कमी है।