नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के कारण केरल के दर्जनों पर्यटक पहाड़ी इलाकों में फंस गए हैं। केरल राज्य सरकार ने नोर्का-रूट्स (NoRKA-Roots) और विदेश मंत्रालय के समन्वय से आपातकालीन बचाव अभियान शुरू किया है और विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
- केरल के लगभग 25-30 पर्यटकों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे होने की पुष्टि हुई है, यह संख्या बढ़ने की आशंका है।
- ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
- नोर्का-रूट्स और नेपाल में भारतीय दूतावास ने प्रभावितों के लिए विशेष आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण केरल के अनुमानित 25 से 30 पर्यटक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंस गए हैं। केरल सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
गैर-निवासी केरलवासियों के लिए आधिकारिक एजेंसी नोर्का-रूट्स (NoRKA-Roots) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश माधवन ने पुष्टि की कि एजेंसी को फंसे हुए लोगों के परिवारों से कई आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा, कन्हांगड़ के एक पूर्व पुलिस अधिकारी सहित केरल के 36 पर्यटकों के एक अन्य समूह के भी प्रभावित पहाड़ी क्षेत्र में फंसे होने की अपुष्ट खबरें हैं।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों से पर्यटकों को निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। यह क्षेत्र ट्रेकिंग के लिए काफी लोकप्रिय है, लेकिन भूस्खलन, पुलों के टूटने और सड़कों के बह जाने के कारण यह इलाका नेपाल के अन्य हिस्सों से पूरी तरह कट गया है।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के निर्देश पर मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। दिल्ली में तैनात एनआरके (NRK) विकास अधिकारी को काठमांडू में भारतीय दूतावास के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर बचाव कार्यों के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्र में चरम मौसम की बढ़ती घटनाएं तेजी से बढ़ते ईको-टूरिज्म क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा हैं। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पिघलने की गति तेज हो रही है, भारत और नेपाल के बीच सीमा पार आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल को आधुनिक बनाना बेहद जरूरी हो गया है ताकि हर साल इन संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा करने वाले हजारों पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
"इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता संपर्क से कटे क्षेत्रों में फंसे समूहों के साथ संचार माध्यम स्थापित करना है। नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर उपग्रह ट्रैकिंग और समन्वित हवाई बचाव अभियान इस चरण में सबसे महत्वपूर्ण हैं।" - आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ
| एजेंसी / प्राधिकरण | हेल्पलाइन नंबर / संपर्क | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| नोर्का ग्लोबल संपर्क केंद्र (टोल-फ्री) | 1800 425 3939 | घरेलू सहायता और परिवारों द्वारा लापता लोगों का पंजीकरण |
| नोर्का ग्लोबल (विदेश से) | +91 88020 12345 (मिस्ड कॉल) | अंतरराष्ट्रीय कॉलबैक और सहायता ट्रैकिंग |
| नेपाल में भारतीय दूतावास | +977 985 131 6807 / +977 970 910 7500 | जमीनी स्तर पर राजनयिक बचाव और निकासी का समन्वय |
Historical Background
हिमालयी देश नेपाल मानसून के मौसम में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहा है। हालांकि, यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की वैज्ञानिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ग्लेशियर टूटने (ग्लेशियल कोलैप्स) के कारण और भी गंभीर हो गई, जिसने बड़े पैमाने पर भूकंपीय गतिविधि को जन्म दिया। इस तरह की घटनाओं को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है, जो पिछले एक दशक में काफी बढ़ गई हैं। यह 2013 की उत्तराखंड त्रासदी और पिछली हिमालयी आपदाओं की याद दिलाता है, जिसने प्रशासन को संभलने का मौका नहीं दिया था।
Frequently Asked Questions
Q1: फंसे हुए पर्यटकों के परिवारों को तुरंत क्या करना चाहिए?
A1: परिवारों को तुरंत नोर्का ग्लोबल कॉन्टैक्ट सेंटर या केरल के मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क करना चाहिए ताकि वे अपने लापता रिश्तेदारों का विवरण दर्ज करा सकें और बचाव अभियान में तेजी लाई जा सके।
Q2: नेपाल में निकासी प्रक्रिया में समय क्यों लग रहा है?
A2: सड़क नेटवर्क को भारी नुकसान, लगातार खराब मौसम और ट्रेकिंग क्षेत्रों के बेहद दुर्गम और पहाड़ी होने के कारण फिलहाल बचाव कार्य केवल हवाई सहायता तक ही सीमित हैं।