अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने स्पष्ट किया है कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ का कारण भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर का ढहना और मलबे का प्रवाह था। इस प्राकृतिक आपदा में 162 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग लापता हैं।

  • USGS के अनुसार, नेपाल की बाढ़ भूकंप के कारण नहीं बल्कि ग्लेशियर के ढहने (Glacial Collapse) से आई थी।
  • प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था, जिसे अब 5.2 के भूकंपीय प्रभाव के रूप में संशोधित किया गया है।
  • इस आपदा में 162 लोगों की मृत्यु हुई है और 133 भारतीय नागरिक लापता हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि बर्फ पिघलने से ग्लेशियर के नीचे पानी जमा होने से वह ढह गया।

नेपाल के रासुवा और धाडिंग जिलों में आई भीषण अचानक बाढ़ (Flash Floods) के पीछे की सच्चाई अब सामने आ गई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने अपने नवीनतम विश्लेषण में यह स्पष्ट किया है कि यह आपदा किसी भूकंप का परिणाम नहीं थी, जैसा कि पहले रिपोर्ट किया गया था। इसके बजाय, यह एक विशाल ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद मलबे के प्रवाह (Debris Flow) के कारण हुआ था।

शुरुआती जांच में इस घटना को 4.4 तीव्रता का भूकंप माना गया था। हालांकि, भूकंपीय स्टेशनों के गहन विश्लेषण और उपग्रह चित्रों (Satellite Imagery) के अध्ययन के बाद, USGS ने इस निष्कर्ष पर पहुँचते हुए कहा कि कोई भूकंप नहीं आया था। इसके बजाय, इस घटना के भूकंपीय प्रभाव को 5.2 तक संशोधित कर दिया गया है, जो ग्लेशियर के अचानक गिरने से उत्पन्न कंपन को दर्शाता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस वैज्ञानिक सुधार का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह आपदा के कारणों को 'भूकंपीय गतिविधि' से बदलकर 'जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों' की ओर मोड़ देता है। यदि यह भूकंप होता, तो यह टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल होती, लेकिन ग्लेशियर का ढहना सीधे तौर पर बढ़ते तापमान और बर्फ पिघलने से जुड़ा है। यह हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिमों की ओर एक गंभीर संकेत है।

ग्लेशियर के नीचे पानी के रिसाव ने उसे लुब्रिकेट कर दिया, जिससे वह अचानक ढह गया।

कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी के भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology) के एसोसिएट प्रोफेसर डैनियल शुगर ने बताया कि 5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक ग्लेशियर चट्टान से नीचे गिर गया। उन्होंने उपग्रह चित्रों की तुलना करते हुए कहा कि पिछले 24 घंटों में ग्लेशियर के आसपास काफी बर्फ कम हुई है। उनका मानना है कि बर्फ और ग्लेशियर के पिघलने से भारी मात्रा में तरल पानी ग्लेशियर के आधार तक पहुँच गया, जिससे वह अस्थिर होकर ढह गया।

ऐतिहासिक संदर्भ

हिमालयी क्षेत्र में 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) की घटनाएं पिछले कुछ दशकों में बढ़ी हैं। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं अब एक नियमित खतरा बनती जा रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नेपाल बाढ़ में कितने भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक शामिल हैं।

2. USGS ने भूकंप की तीव्रता में क्या बदलाव किया है?
USGS ने प्रारंभिक 4.4 तीव्रता के अनुमान को संशोधित कर 5.2 का भूकंपीय प्रभाव दर्ज किया है, जो ग्लेशियर के गिरने को दर्शाता है।

Did You Know?: ग्लेशियर के नीचे पानी जमा होने से 'लुब्रिकेशन इफेक्ट' पैदा होता है, जिससे बर्फ का विशाल हिस्सा अचानक फिसल सकता है।